पखवारे भर से पानी से घिरी झोपड़ियां अब गिरने लगीं
घाघरा नदी की बाढ़ का असर, जलस्तर कम होने के बाद भी बढ़ी परेशानी
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अमर उजाला ब्यूरो
हैंसर। घाघरा नदी का जलस्तर घट रहा है। परंतु पखवारे भर से पानी से घिरी झोपड़ियां अब गिरने लगी हैं। बाढ़ के चलते बांध पर शरण लिए लोगों को पानी कम होने पर घर बनाने की चिंता सताने लगी है। बृहस्पतिवार को घाघरा नदी का जलस्तर घटकर खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर नीचे आ गया। नदी का जलस्तर 79.10 मीटर पर आ गया है। जलस्तर बढ़ने के कारण गायघाट, गुनवतिया, चकदहा, सियरकला, भौंवापार, सरैया, खरैया, सियाराम अधीन सिंह, दौलतपुर, सुअरहा समेत 20 गांव एक माह से बाढ़ की चपेट में हैं। सियरकला, गुनवतिया, भौंवापार और गायघाट के लोग घर में पानी भर जाने की वजह से बंधे पर शरण लिए हुए हैं। बुधवार से नदी का पानी कम होना शुरू हो गया है। बांध पर रहे राममिलन, दीनानाथ, जंगीलाल, रामसुरेश, पूनम, गायत्री, रमावती और कमला आदि का कहना है कि बाढ़ के भय से वे लोग पक्का मकान नहीं बनाते हैं। बाढ़ से घिरे छप्पर भी गिर रहे हैं। इसकी वजह से बरसात बाद भी उन लोगों को तकलीफ झेलनी पड़ेगी। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन राहत सामग्री और मुआवजा देने की बात कर रहा है लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला। बृहस्पतिवार बारिश के चलते बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें और बढ़ गईं।