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अटूट आस्था के साथ डूबते हुए सूर्य को दिया अर्घ्य

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अर्घ्य देने के बाद कपूर जलाती महिलाएं। - फोटो : amarujala
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संतकबीरनगर। छठ पूजा के लिए नए वस्त्रों में डलिया में फल-फूूल, ठेकुआ, मिठाई सिर पर लिए नंगे पांव श्रद्धालु महिलाएं गुरुवार को शाम होते ही निकट के नदियों और पोखरों के लिए घरों से निकल पड़ी। उनके साथ सहयोगी पति, पुत्र, पुरोहित तथा परिवार के अन्य सदस्य भी दिखे। कांच के बांस के बहिंगया... और ... सुनु लेहु अरज हमार हे छट्ठी मैया आदि गीतों के धुन गुनगुनाती टोलियों में महिलाएं पूजास्थल पर पहुंच कर अलग- अलग जगह निर्धारित की और अर्घ्य की तैयारी पूरी की। जैसे ही सूर्य अस्ताचल की ओर जाते दिखे, घुटने भर पानी में खड़ी महिलाओं ने अपने सहयोगी की मदद से फल और पूजन सामग्री की डलिया हाथ में ले ली। दूसरे हाथ से अपने केश की लट हाथ में लेे अर्घ्य देना शुरु की। पूजा में रत माताओं -बहनों ने भगवान भाष्कर की पूजा के बाद किनारे घाट पर गन्ने के मंडप तले वेदी बनाकर छठ माता की पिंडी बनाकर उनकी अच्छत, फूल, सिंदूर आदि से पूजन की, आरती उतारी और नैवेद्य के रुप में नारियल, फल फूल, मिठाई, ठेकुआ आदि अर्पित की। उसके बाद मनोवांछित वरदान मांगी। इस दौरान नगर पालिका के कर्मी व पुलिस प्रशासन के लोग उपस्थित रहे। खलीलाबाद में कोतवाली के उत्तर पोखरे पर, बिधियानी समय जी के मंदिर के पोखरे और सुगर मिल के कृत्रिम सरोवर पर भारी संख्या में महिलाओं ने अर्घ्य देकर पूजा अर्चना की। गोला बाजार के पोखरे पर महिलाओं ने अर्घ्य देकर पूजा अर्चना की। यहां पर मेले जैसा दृश्य रहा। व्यवस्था में जन सेवा संस्थान के सर्वदानंद पांडेय, महेश गुप्त, शिव कुमार, राजू, दीपचंद, ओंकारनाथ आदि मौजूद रहे। बखिरा एवं मेंहदावल प्रतिनिधि के अनुसार बखिरा के भंगेश्वरनाथ मंदिर के पोखरे के जल में खड़ी होकर महिलाओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दी और छठ पूजन की। मेंहदावल के कुबेरनाथ स्थान तथा राप्ती नदी के किनारे जोरवा ,करमैनी, बेलौली में नदी के किनारे पूजा की गई। मगहर प्रतिनिधि के अनुसार नगर पंचायत मगहर में आमी नदी के किनारे साफ सफाई की व्यवस्था की गई थी। शिवमंदिर से उत्तर आमी के तट पर खड़ी व्रती महिलाओं ने अस्त होते सूर्य को जल अर्पित कर छठ पूजा की। इसी प्रकार धनघटा तहसील के मुखलिसपुर में कुआनो नदी के किनारे और घाघरा नदी के बिड़हरघाट तथा अन्य घाटों पर श्रद्धालु महिलाओं ने छठपूजा की।
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