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गांव वालों ने किया विरोध

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बालू खनन के रास्ते को गांव वालों ने रोका
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- विरोध के बाद लौट गए ठेकेदार
फोटो है
अमर उजाला ब्यूरो
हैंसर/ रोसया। रविवार को क्षेत्र के भोतहा घाट पर बालू खनन करने के लिए रास्ता बनवाने गए ठेकेदार व उनके मजदूरों को गांव वालों के विरोध का सामना करना पड़ा। गांव के लोग फसलों के नष्ट होने और नदी द्वारा कटान की आशंका व्यक्त करते हुए काम को रोक दिया। महिलाओं द्वारा विरोध करने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन मामला बना नही तो पुलिस और ठेकेदार वापस लौट गए।
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घाघरा नदी के भोतहा घाट पर बालू खनन का पट्टा हुआ है। जिस पर खनन कराने के लिए ठेकदार मजदूरों और पोकलैंड मशीन के साथ रास्ता निर्माण कराने पहुंचे। जब रास्त बनाए जाने लगा तो भोतहा गांव की सैकड़ों महिलाएं हाथ में लाठी डंडा लेकर वहां पहुंच गई और रास्ता निर्माण का विरोध करने लगी। गांव वालों के विरोध को देख काम बंद हो गया। उसके बाद सूचना पर पौली चौकी इंचार्ज जितेंद्र यादव भी फोर्स मौके पर पहुंचे। वह महिलाओं को समझाने का प्रयास करने लगे, लेकिन उनकी बात गांव के लोग नहीं मानी। गांव वालों का कहना था कि खनन होने से नदी कटान करती हुई गांव को अपने चपेट में ले सकती है। करीब एक घंटा तक गांव के लोगों को समझाने का प्रयास हुआ, लेकिन वह माने नहीं। बालू खनन को लेकर रास्ता विवाद इस क्षेत्र में दूसरी बार हो रहा है। इसके पहले पिछले साल छपरामगर्बी में बालू खनन को लेकर पुलिस और गांव के लोगों के बीच संघर्ष हुआ था। जिसमें पुलिस और गांव के लोग घायल हो गए थे। सौ से अधिक ग्रामीणों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ था। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते इस मामले को सुलझाने का प्रयास नहीं किया तो छपरामगर्बी की घटना फिर से हो सकती है। एसडीएम बाबूराम का कहना है कि दोनों पक्षों के सहमती से इस मामले का शांति पूर्वक समाधान कर दिया जाएगा। बालू खनन का पट्टा जब हुआ तो खनन तो होना ही चाहिए।
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