- बदलती जीवन शैली और काम के बढ़ते दबाव के बीच लोग अनिद्रा के शिकार हो रहे
संतकबीरनगर। बदलती जीवनशैली और बढ़ते काम के दबाव के बीच लोगों की नींद पर गहरा असर पड़ रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 20 मरीज नींद नहीं आने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि लगातार स्क्रीन देखने, तनाव और अनियमित दिनचर्या से लोगों में अनिद्रा की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पर्याप्त नींद न लेने से न केवल मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। नींद पूरी न होने पर कामकाज प्रभावित होता है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है, हार्मोन असंतुलन होता है और आपसी रिश्तों पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति सात घंटे से कम सोता है तो शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे रक्तचाप भी बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि इस तरह के प्रतिदिन 20 से 30 मरीज जिला अस्पताल आते है और परामर्श लेकर इलाज कराते हैं।
नींद न आने के ये हैं प्रमुख कारण
काम का बढ़ता दबाव, अनियमित दिनचर्या, मोबाइल व स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग, शाम के समय चाय-कॉफी का सेवन, खराब नींद की आदतें और बुरे सपने प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। डाॅ. कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि बिस्तर पर लेटने और वास्तविक नींद लेने में अंतर होता है। कई लोग लंबे समय तक बिस्तर पर रहते हैं, लेकिन उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती। काम के बोझ और तनाव के कारण लोग अनिद्रा के शिकार हो रहे हैं। इसके चलते तनाव, एडजस्टमेंट डिसऑर्डर और अन्य मानसिक समस्याओं के मरीज भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि नींद की दवाइयां केवल चिकित्सकीय परामर्श से ही लें।
ऐसे करें बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित नींद का समय तय करें, सोने से पहले स्क्रीन का उपयोग बंद करें, कैफीन और भारी भोजन से बचें तथा बेडरूम को शांत और आरामदायक बनाएं। साथ ही हल्का व्यायाम और संतुलित दिनचर्या अपनाकर बेहतर नींद पाई जा सकती है।