बखिरा ताल में आने लगे विदेशी मेहमान
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अब तक चिड़ियों की संख्या कम होने से पक्षी प्रेमी चिंतित
अमर उजाला ब्यूरो
बखिरा। पक्षी विहार बखिरा में वैसे तो हर साल प्रवासी पक्षियों की अधिकता रहती है। हजारों की संख्या में साइबेरियन चिड़ियां झील में आती हैं। इस साल नवंबर समाप्त होने को है, लेकिन अब तक कुछ सौ की संख्या में ही प्रवासी पक्षियां ही आ सकी हैं। जानकर बताते हैं कि इस साल ठंडक का प्रभाव कम होने से चिड़ियों की आवक कम है। फिलहाल पक्षी प्रेमियों ने दिसंबर में चिड़ियों के आने की उम्मीद जताई है।
बखिरा पक्षी विहार 29 वर्ग किमी के क्षेत्रफल में फैला है। वर्ष-1990 में बखिरा झील को पक्षी विहार घोषित कर दिया गया था। झील की देखरेख व पक्षियों की सुरक्षा के लिए वनकर्मियों की तैनाती की गई, लेकिन 28 साल बाद भी झील के विकास के लिए जिम्मेदारों ने पहल नहीं की। अब पक्षी विहार की सुरक्षा दिसंबर में सेवानिवृत्त होने वाले क्षेत्रीय वनाधिकारी के जिम्मे है। झील में लालसर, जलकौआ, सिलेटी अंजन, लाल अंजन, डुगडुगी, लाल गोई, रंगीन जांघिल, सफेद बाज, सुर्खाब, चील, बड़ा गरूण, नीलसर, सारस, टिटिहरी, हुदहुद, धनेश समेत अनेक प्रवासी पक्षियां प्रति वर्ष अक्तूबर में सैकड़ों की संख्या में आती हैं। इससे झील की रौनक बढ़ जाती है। पक्षियों को देखने गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर समेत आसपास क्षेत्र से भी लोग पहुंचते हैं। जानकर बताते हैं कि ठंडक पड़ने पर ही प्रवासी चिड़िया झील में आती हैं। क्षेत्रीय वनाधिकारी सुरेशराम ने कहा कि इस साल अब तक झील में करीब दो सौ की संख्या में ही पक्षियां आई हैं। यह बहुत ही चिंता का विषय है। उम्मीद है दिसंबर तक इनक संख्या अधिक हो सकती है।
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कर्मचारियों की कमी से पक्षियां असुरक्षित
बखिरा। पक्षी विहार कार्यालय बखिरा में इन दिनों कर्मचारियों की बेहद कमी है। एक वनरक्षक, चार अस्थाई नाविकों व दिसंबर में सेवानिवृत्त होने वाले रेंजर के भरोसे 29 किमी परिक्षेत्र में पसरे झील की सुरक्षा व्यवस्था है। एक साल से मानदेय नहीं मिलने से नाविकों ने काम करने से मना कर दिया है। ऐसी स्थिति में स्टाफ की कमी से झील में आने वाले चिड़ियों की सुरक्षा ही खतरे में है। अक्तूबर से फरवरी तक झील में रहने वाले चिड़ियों की सुरक्षा के लिए सोहगीबरवां में बैठे हुए विभाग के जिम्मेदार लापरवाह बने हुए हैं।