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बिना पढ़े ही परीक्षा देंगे परिषदीय स्कूल के बच्चे

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संतकबीरनगर। पढ़ाई की बजाय केवल शैक्षिक नवाचार की प्रयोगशाला बन चुके परिषदीय स्कूलों में अब तक डिमांड से आधी पुस्तकें भी नहीं मिल पाई हैं, जो पुस्तकें मिली हैं, उनमें से भी अधिकांश सत्यापन के अभाव में वितरण के बजाय स्टोर में पड़ी हैं। यहां तक सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी इंग्लिश मीडियम के प्राइमरी स्कूलों में भी किताबें नहीं बंटी हैं। हद तो यह है कि इस महीने की आखिरी सप्ताह में इन बच्चों की त्रैमासिक परीक्षा (सत्र परीक्षा) होनी है। अब जब किताब ही नहीं है तो बच्चे पढ़ेंगे क्या और परीक्षा किस आधार पर होगी?
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जिले में 1522 परिषदीय स्कूल हैं, जिनमें से 1075 प्राथमिक व 447 जूनियर विद्यालय हैं। इनमें एक लाख 32 हजार बच्चों का नामांकन है। शासन की मंशा के अनुरूप 45 परिषदीय विद्यालयों को इस शैक्षिक सत्र से अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई के लिए चयनित किया गया है। इन अंग्रेजी माध्यम वाले स्कूलों में भी जुलाई से पढ़ाई शुरू हो गई है। लेकिन सरकार के तमाम दावों के विपरीत अब तक बच्चों के लिए किताबें ही नहीं आ पाई हैं। अलग-अलग कक्षाओं के लिए कुल 77 प्रकार की किताबों की डिमांड है। सभी बच्चों को किताबें उपलब्ध कराने के लिए 10 लाख किताबों की जरूरत है लेकिन अभी तक कुल मिलाकर करीब सवा सात लाख किताबें ही मिली हैं। इसमें से भी करीब आधी किताबें सत्यापन के अभाव में वितरित नहीं हो पाई हैं। विभागीय शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार सितंबर महीने के प्रथम सप्ताह तक पढ़ाए गए विषय के लिए दूसरे सप्ताह में सत्र परीक्षा करानी होती है। अब जब किताब ही नहीं है तो सत्र परीक्षा किस पढ़ाई के आधार पर कराएंगे। बीएसए सतेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि अब तक सात लाख सोलह हजार पुस्तकें मिल चुकी हैं। कुछ पुस्तकें सत्यापन के अभाव में वितरित नहीं हो पाई हैं। इसी सप्ताह उनका सत्यापन कराकर वितरण कराया जाएगा। हर जगह अध्यापक वैकल्पिक व्यवस्था कर पढ़ाई करा रहे हैं। समय से सत्र परीक्षा संपन्न कराई जाएगी।
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