फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बढ़ती जा रही है बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें

Mon, 20 Aug 2018 11:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
विज्ञापन
घाघरा नदी की बाढ़ से घिरा गुनवतिया और ढोलबजा गांव। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
हैंसर। एक पखवारे से घाघरा नदी की बाढ़ का दंश झेल रहे दियारावासियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। फसल तो चौपट हो ही चुकी है, अब घर खाली करने की नौबत आ गई है। कई घरों में फांकाकशी की नौबत है। इसके बाद भी प्रशासन उनकी समस्याओं को नजर अंदाज कर रहा है। एमबीडी बांध और घाघरा नदी के बीच बसे गायघाट, गुनवतिया, चकदहा, ढोलबजा, सुअरहा, दौलतपुर, सरैया, खरैया, सियराम अधीन सिंह, भौंवापार समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। कई घरों के अंदर तक पानी है। पानी में डूबी होने की वजह से फसलें बर्बाद हो रही हैं। तिघरा कुटी से करीब पांच किलोमीटर नाव या पानी में पैदल चलकर लोग बांध पर पहुंच रहे हैं। इसके बाद भी प्रशासन इन्हें बाढ़ पीड़ित नहीं मान रहा है। इसकी वजह से कोई सरकारी मदद भी नहीं मिल रही है। रामअधीन बताते हैं कि उनके परिवार में आठ सदस्य हैं जिनमें से चार बच्चे हैं। घर में रखा अनाज समेत खाने-पीने का सामान खत्म हो गया है। पशुओं के लिए भी चारे का संकट है। बुझारत का कहना है कि 15 दिन गांव के लोग बाढ़ से परेशान हैं, लेकिन न तो अधिकारी खोज खबर ले रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि। इस संबंध में एसडीएम बाबूराम का कहना है कि प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों को उपेक्षित नहीं किया है। उनकी मदद के लिए हर संभव उपाय किए जा रहे हैं।
विज्ञापन


जलस्तर स्थिर, गांव में मदद के इंतजार में रुके हैं लोग
हैंसर। घाघरा नदी का जल स्तर सोमवार को स्थिर बना रहा। नदी अब भी खतरे के निशान से उपर बह रही है। एमबीडी बांध और नदी के बीच बसे जिन आठ गांवों में पानी घुसा है, वहां के लोगों के सामने भोजन का संकट गहरा गया है। हालांकि प्रशासन अगले कुछ दिनों में हालात सामान्य होने की उम्मीद के चलते हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
घाघरा नदी का जलस्तर पांच दिनों से बढ़ रहा था। रविवार को नदी खतरे के निशान से तीन सेंटीमीटर उपर पहुंच गई। इसके चलते किनारे बसे गांव गायघाट, चकदहा, गुनवतिया, सरैया, खरैया, ढोलबजा, सुअरहा, दौलतपुर, भौंवापार में पानी घुस गया था। गांव के किनारे बने घरों में भी पानी भर गया है। इसके अलावा आगापुर , गुलरिहा, खालेपुरवा, पटौवा, पड़रिया, भरपुरवा आदि गांव चारों तरफ बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इन ग्रामीणों के लिए राहत की बात बस इतनी है कि सोमवार को नदी का जलस्तर स्थिर रहा। हालांकि बाढ़ प्रभावितों को अब तक कोई सरकारी मदद नहीं मिल पाई है। लोगों के घरों में मौजूद खाने-पीने का सामान खत्म होने के कगार पर है। अगर अगले दो तीन दिन में पानी कम नहीं हुुआ तो लोग बीमारियों की भी चपेट में आ जाएंगे। बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों का कहना है कि पशुओं के लिए चारे का संकट गहरा गया है। एसडीएम बाबूराम का कहना है कि नदी का जलस्तर स्थिर है। जिन गांवों में बाढ़ का पानी घुसा है वहां से लोगों को निकालने के लिए छह छोटी नाव लगाई गई है लेकिन लोग घर छोड़कर बाहर आने को तैयार नहीं हैं। अगले दो से तीन दिन में पानी में कमी आने और हालात सामान्य होने की उम्मीद है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें