बखिरा। जिले के बखिरा वन्यजीव अभयारण्य के संरक्षित क्षेत्र में अब प्रवासी परिंदों का आशियाना संवरेगा। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट कमेटी द्वारा इसे संवेदी क्षेत्र घोषित करने से अब बखिरा झील में आने वाली प्रवासी पक्षियों के शिकार पर सख्ती से रोक लगेगी और उनका संरक्षण भी हो सकेगा।
इनका शिकार अब आपराधिक कृत्य माना जाएगा। माना जा रहा है कि जनपद को यह महत्वपूर्ण उपलब्धि पूर्व जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही व सांसद शरद त्रिपाठी के प्रयास से हासिल हुई है।
बखिरा झील 29 वर्ग किमी में फैली है। झील को 1990 में पक्षी विहार घोषित करके यहां शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस झील में 120 प्रकार के प्रवासी पक्षी आते हैं।
इनमें प्रमुख रूप से लालसर, शिवहंस, डुबडूबी, जलकौआ, सिलेटी अंजन, लाल अंजन, गोई लाल गोई, रंगीन जांघिल, काला जांघिल, सफेद बाज, काला बाज, सुर्खाब, कपासी चील, बड़ा गरुण, नील सर, सारस, ताल मखानी, पीली टिटिहरी आदि हैं। झील में पक्षियों व जलीय वनस्पतियों के संरक्षण के लिए बीते नौ फरवरी को केंद्रीय टीम ने आकर यहां जायजा भी लिया था।
पूर्व जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने शासन को पत्र लिखकर बखिरा झील की देखरेख के लिए इसका नियंत्रण संतकबीरनगर से करने व इसके संरक्षण के विशेष प्रयासों के लिए प्रयास किया था। सांसद शरद त्रिपाठी ने बताया कि बखिरा झील का उत्थान उनकी प्राथमिकता में है।
इसके लिए लगातार प्रयास जारी थे। एडीएम रणविजय सिंह ने बताया कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से इलाके के एक किलोमीटर के दायरे को संवेदी क्षेत्र घोषित करने की आधिकारिक सूचना अभी नहीं मिली है। हालांकि ऐसा होने पर प्रवासी पक्षियों के लिए यह उपयुक्त स्थान के रूप में विकसित किया जा सकेगा।