नसबंदी की नहीं, चीरा लगाकर चले गए डॉक्टर
आशा वर्कर और घर वालों के हंगामे पर बस्ती से दूसरे सर्जन को बुलाना पड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। संयुक्त जिला चिकित्सालय में मंगलवार को एक सर्जन की लापरवाही से पांच महिलाओं की जान पर बन आई। सर्जन ने महिलाओं का नसबंदी ऑपरेशन शुरू तो किया लेकिन उसे अधूरा छोड़कर चले गए। कुछ देर बाद जब घर वालों और उन्हें लेकर आईं आशा कार्यकर्ताओं को जानकारी हुई तो वे हंगामा मचाने लगीं। ऐसे में सीएमओ ने एडी हेल्थ बस्ती से बात कर एक सर्जन को बुलाकर नसबंदी पूरी कराई। इसके बाद लोग शांत हुए।
मंगलवार को नाथनगर की सुुुभद्रा, भुजैनी की सोनाली, महुआपार की प्रेमलता, धनखिरिया की निशा और एक अन्य महिला नसबंदी कराने जिला अस्पताल पहुंचीं। शाम चार बजे सर्जन डॉ. संजीत मिश्र ने पांचों महिलाओं को आपरेशन थियेटर में बुलाया। आशा कार्यकर्ता और घरवालों का आरोप है कि डॉक्टर ने नसबंदी तो की नहीं अलबत्ता चीरा लगाकर छोड़कर चले गए। यहां तक कि टांका भी नहीं लगाया। कुछ देर बाद जब घर वालों को जानकारी हुई तो उन्होंने सर्जन को खोजा। उनके न मिलने पर हंगामा शुरू कर दिया।
सूचना पर सीएमओ डॉ. हरिगोविंद सिंह और सीएमएस डॉ. पंकज टंडन पहुंचे। सीएमओ ने एडी हेल्थ बस्ती आरजे द्विवेदी को जानकारी दी। उन्होंने सर्जन डॉ. एसआर कन्नौजिया को भेजा। उन्होंने नसबंदी के बाद महिलाओं को टांके लगाए। सीएमओ ने बताया कि इस प्रकरण से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। घर वाले अगर शिकायत करते हैं तो कार्रवाई की जाएगी। उधर, सीएमएस डॉ. पंकज टंडन का कहना है कि सर्जन क्यों ऑपरेशन अधूरा छोड़कर चले गए, इसपर उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।