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बदलेगी समाज की सोच, तभी सुरक्षित होंगी महिलाएं

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बदलेगी समाज की सोच, तभी सुरक्षित होंगी महिलाएं
- अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के तहत आयोजित हुई महिला जागरूकता गोष्ठी

अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। घर, सड़क और कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाए गए हैं। इसके बावजूद आए दिन महिलाओं के साथ हिंसा और उत्पीड़न की खबरें सुनने को मिलती हैं। इस पर अंकुश तभी लगेगा जब समाज की सोच बदलेगी। लोग महिलाओं को सम्मान की नजर से देखेंगे और उन्हें बराबर का दर्जा देंगे। ये बातें मंगलवार को अमर उजाला फाउंडेशन के अभियान अपराजिता के तहत कबीरचौरा परिसर में आयोजित महिला जागरूकता गोष्ठी में मगहर की चेयरमैन संगीता वर्मा ने कहीं।
मुख्य अतिथि वर्मा ने कहा कि देश में विकास की खबरों के बीच महिला उत्पीड़न की घटनाएं भी हो रही हैं। यह दुखद है। इस मामले में सिर्फ कानून बनाने से काम नहीं चलेगा। समाज की सोच में बदलाव जरूरी है। जब तक समाज में महिलाओं को बराबर का दर्जा नहीं मिलेगा उन्हें उचित सम्मान नहीं मिलेगा। महिलाओं को समान अधिकार दिया गया है, लेकिन समाज की सोच आज भी पुरानी है और अधिकांश पुरुष उन्हें अपने से कमतर मानते हैं। यह मानसिकता बदलनी चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कबीरचौरा परिसर के महंत विचार दास ने कहा कि हमारी संस्कृति में नारी को पुरुषों की अपेक्षा अधिक सम्मानजनक स्थान दिया गया है, लेकिन हकीकत में महिलाओं की स्थिति उतनी बेहतर नहीं है। कहा कि जहां नारी का अपमान होता है वहां कभी भी सुख समृद्घि नहीं आती। इस दौरान संत ज्ञानेश्वरदास, महंत कन्हैैया दास, संत केशवदास, संत अरविंद दास शास्त्री, त्रिलोकीनाथ वर्मा, राजकुमार, तेजपाल सिंह, राजू, राजेश पाल, राजेंद्र, देवेंद्र कुमार झा, दिनेश कुमार शर्मा, रामशरन दास, कल्पनाथ दास, विनोद दास, शांति दास, शकुंतला, सुनीता, स्नेहा, राजकुमारी की मौजूदगी रही।
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महिलाओं की प्रतिक्रिया
- महिलाों को घर और बाहर कई तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है। समाज की सोच में बदलाव के साथ ही महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। --स्वीटी
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- गोष्ठी में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। गांव के अन्य महिलाओं को इसकी जानकारी दूंगी और अपने हक के लिए आवाज उठाने को प्रेरित करूंगी। - संध्या
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- महिलाओं के लिए कानून बने हैं। समाज में बदलाव भी हो रहा है, लेकिन इसकी गति धीमी है। अपराजिता अभियान से महिलाएं जागरूक होंगी। - सुरेश देवी
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- महिलाएं अब पहले से अधिक जागरूक हैं। वह बेटियों को भी बेटों के समान शिक्षा दिला रही हैं। समय-समय पर अपराजिता अभियान के तहत कार्यक्रम होने चाहिए। - शारदा देवी
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