लगभग 26 साल के बाद लुधियाना से घर पहुंचे प्रभुनाथ।
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कांटे (संतकबीरनगर)। सेमरियावां ब्लॉक के गांव भैंसा सेहरी निवासी मनिराम चौधरी का इकलौता बेटा प्रभुनाथ 26 वर्षों बाद शनिवार को घर लौटा तो खुशी से परिजनों की आंखें खुशी के आंसू से भर आई। पंजाब प्रांत के लुधियाना शहर में मजदूरी कर रहे प्रभुनाथ के बारे में बस्ती जिले के एक व्यक्ति ने घरवालों को खबर दी थी।
वर्ष 1993 में शादी के बाद रोजगार की तलाश में घर से निकले प्रभुनाथ का कई महीनों तक पता नहीं चला तो पिता मनिराम और उनके भाई हरिलाल और मुन्नीलाल ने प्रभुनाथ की तलाश शुरू की लेकिन उनका कहीं पता नहीं चला। परिवार के लोग यह मान बैठे थे कि प्रभुनाथ अब इस दुनियां में नहीं हैं। वहीं प्रभुनाथ का गवना नहीं हुआ था। सबकी सहमति पर मायके में रह रही पत्नी की दूसरी शादी हो गई। अचानक कुछ दिन पहले बस्ती जिले के मुंडेरवा थाने के ग्राम कोहड़वा निवासी एक व्यक्ति ने भैंसा सेहरी गांव आकर प्रभुनाथ के परिजनों को खबर दी कि वह लुधियाना (पंजाब) के जमालपुर स्थित एक कारख़ाने में काम करता है और दुर्घटना में पैर फ्रैक्चर हो गया है। सूचना की पुष्टि के लिए प्रभुनाथ के परिवार के लोग बताए गए पते पर लुधियाना पहुंचे तो उन्हें प्रभुनाथ मिल गए। किशोरावस्था में लापता हुए प्रभुनाथ घरवालों को देखते ही रो पड़े। शनिवार की सुबह घरवालों के साथ प्रभुनाथ भैंसा सेहरी गांव वापस आए। 26 साल पहले गायब हुए प्रभुनाथ को देखते ही महिलाओं की आंखों से आंसू बह निकले। प्रभुनाथ को देखने के लिए गांव के तमाम लोग भी पहुंच गए। प्रभुनाथ ने बताया कि एक दिन लुधियाना में कुछ लोगों से बातचीत के दौरान गांव की चर्चा होने लगी। मुंडेरवा के पास के रहने वाले उन लोगों से क्षेत्र का हाल चाल जानकर घर आने की इच्छा प्रबल हो गई।