संतकबीरनगर। प्राइवेट स्कूलों द्वारा लिए जाने वाले मनमानी शुल्क पर लगाम लगने की उम्मीद जगी है। इसके तहत स्कूलों को कक्षावार शुल्क संबंधी जानकारी प्रशासन को देनी होगी। अपनी बेवसाइट पर अपलोड करने के साथ ही सूचनापट पर शुल्क की जानकारी चस्पा करनी होगी। पूरे साल की एक बार में फीस नहीं ले सकेंगे। इस पर निगरानी के लिए डीआईओएस और बीएसए को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। शुल्क वृद्धि भी पांच प्रतिशत वार्षिक से अधिक नहीं ली जा सकेगी।
दरअसल, प्राइवेट विद्यालय हर वर्ष मनमानी कर अभिभावकों से मनचाहा शुल्क वसूलते हैं। यही नहीं, स्कूल से ही ड्रेस, कापी, किताब व अन्य सामग्री भी विद्यालय से ही खरीदने का दबाव बनाते हैं। इससे अभिभावकों पर खासा बोझ पड़ता है। शासन ने प्राइवेट स्कूलों के शुल्क निर्धारण पर सख्ती शुरू कर दी है। जनपद स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में जिला शुल्क नियामक समिति का गठन किया गया है। अब हर विद्यालय को शैक्षिक सत्र शुरू होते ही कक्षा वार शुल्क का विवरण डीआईओएस और बीएसए के पास जमा करना होगा। इससे स्कूल की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा और सूचनापट पर चस्पा भी करना होगा। शुल्क मासिक, त्रैमासिक और अर्द्धवार्षिक किस्तों में ही जमा कराया जा सकेगा। विद्यालय पांच वर्ष तक यूनिफॉर्म में परिवर्तन नहीं कर सकेंगे। यदि परिवर्तन जरूरी होने पर उसकी अनुमति जनपदीय शुल्क समिति से लेनी होगी। विद्यालय हर वर्ष मात्र पांच प्रतिशत ही शुल्क में वृद्धि कर सकते हैं। जितने माह पढ़ाई होगी उतने माह की ही फीस वसूल कर सकते हैं।
ड्रेस, किताब, कॉपी की खरीद का नहीं बना सकेंगे दबाव
जिले में करीब 200 प्राइवेट विद्यालय हैं। नए नियम के तहत स्कूल शैक्षिक शुल्क लेने के बाद अभिभावकों से ड्रेस, किताब, जूता मोजा और कॉपी अपने विद्यालय से खरीदने का दबाव नहीं बना सकेंगे। अभिभावक अपनी इच्छानुसार कहीं से भी खरीदारी कर सकेंगे। डीएम की अध्यक्षता में गठित जनपदीय शुल्क समिति इस पर भी निगरानी करेेगी।
आदेश का उल्लंघन करने पर मान्यता होगी रद्द
डीएम रवीश गुप्त ने बताया कि प्राइवेट विद्यालयों के शुल्क वसूली पर मनमानी लगाने के लिए डीआईओएस और बीएसए को जिम्मेदारी सौंपी गई है। विद्यालय जो शुल्क लेंगे उसकी पूरी सूचना वे अपने विद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे। विद्यालय की तरफ से वसूले जाने वाले हर फीस पर प्रशासन की नजर रहेगी। जो विद्यालय आदेश का उल्लंघन करेगा उसकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।