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गोवंश आश्रय पर पशुओं की संख्या कम होने पर डीएम सख्त

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15 दिन के अंदर सभी आवारा पशुओं को गोवंश आश्रय तक पहुंचवाने का डीएम ने दिया निर्देश - फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। जनपद में छुट्टा पशुओं की भरमार है। इसके लिए सरकार गोवंश पशु आश्रय स्थल खोलकर आवारा पशुओं के रहने का इंतजाम करवा रही है लेकिन जनपद में आवारा पशुओं के आश्रय तक न पहुंचने को लेकर डीएम ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने ग्राम पंचायत और हल्का लेखपालों को यह जिम्मेदारी दी है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में विचरण कर रहे छुट्टा पशुओं को अपने निकटतम पशु आश्रय तक पहुंचाने का काम करेंगे। यदि इसमें उनकी लापरवाही उजागर होती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने 15 दिन के अंदर सभी आवारा पशुओं को गोवंश आश्रय तक पहुंचाने का निर्देश संबंधित कर्मचारियों को दिया है।
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डीएम रवीश गुप्त ने जिले के तीनों एसडीएम, सभी ब्लॉक के बीडीओ और सभी नगर पालिका अधिशासी अधिकारी को पत्र भेज कर असंतुष्टि जाहिर करते हुए कहा है कि स्थाई /अस्थाई गोवंश पशु आश्रय स्थलों पर संरक्षित पशुओं की संख्या अत्यधिक कम है। इसका एक ही कारण है कि छुट्टा पशु किसानों के खेतों में जाकर उनकी फसलों को नष्ट कर रहे हैं। ऐसे में पशुधन विभाग द्वारा सर्वेक्षण के बाद पशुओं की संख्या विभिन्न क्षेत्रों में निर्धारित की गई है। क्षेत्रवार ग्राम पंचायत व हल्का लेखपाल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे पशुओं को ढूढ़कर अपने नजदीकी खाली पड़े पशु आश्रय तक पहुंचवाएं। इसके लिए एसडीएम, खंड विकास अधिकरी लेखपाल / सचिव वार लक्ष्य निर्धारित कर पशु चिन्हित कर 15 दिन के अंदर संरक्षित करना है। डीएम रवीश गुप्त ने बताया कि जब भी कोई पशु निरूद्ध किया जाएगा वह क्षेत्रीय लेखपाल व सचिव दोनों की उपलब्धि मानी जाएगी। इसके बाद क्षेत्र में यदि छुट्टा पशु पाया जाता है तो यह उनकी लापरवाही मानी जाएगी। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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