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जिला अस्पताल में खुला है जन औषधि केंद्र

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उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा जन औषधि केंद्र
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सस्ते दर पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए खोला गया था जन औषधि केंद्र
इस केंद्र पर उपलब्ध नहीं है कोई महत्वपूर्ण दवा
प्राइवेट दुकानों से कई गुना रेट पर खरीदनी पड़ती हैं दवाएं
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। बड़े जोर- शोर से केंद्र सरकार ने जिस जन औषधि केंद्र का उद्घाटन कराया था, संतकबीरनगर जिले में उसकी हालत बेहद खराब है। बीते जुलाई में जिला अस्पताल में शुरू हुए इस केंद्र में अब कुछ सामान्य सी दवाएं ही उपलब्ध हैं। डॉक्टर भी यहां उपलब्ध दवाएं कम ही लिखते हैं। नतीजतन बीमार लोगों को अच्छी दवाओं के लिए प्राइवेट दवा की दुकानों पर जाना पड़ता है।
सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली जेनरिक दवाइयों व प्राइवेट दुकानों पर मिलने वाली ब्रांडेड दवाइयों की कीमत में भारी अंतर को देखते हुए केंद्र सरकार ने हर जिले में जन औषधि केंद्र खोलने का निर्णय लिया था। इस केंद्र पर नियंत्रित दर पर जेनरिक दवाइयां मिलनी हैं। जिला अस्पताल परिसर में जुलाई में जन औषधि केंद्र का उद्घाटन सांसद शरद त्रिपाठी ने किया था। लोगों को सस्ती दर पर अच्छी दवाइयां मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन केंद्र पर पर्याप्त मात्रा में दवाइयां ही नहीं मिलीं। अब भी यहां बुखार, खांसी, सिरदर्द, उल्टी-दस्त की दवाइयां ही मिलती हैं। जन औषधि केंद्र पर मौजूद दवाइयां व बाजार में मिलने वाली दवाइयां की कीमत में कई गुना अंतर है। उदाहरण के तौर पर जन औषधि केंद्र पर पैरासिटामाल का एक पत्ता (10 टेबलेट) पांच रुपये का है, जबकि बाजार में इसकी कीमत 12 रुपये है। दर्द निवारक दवा डाइक्लो के एक पत्ता की कीमत इस केंद्र पर तीन रुपये है, जबकि बाहर इसकी कीमत 80 रुपये है। इसी तरह सिफैक्जीम टेबलेट का एक पत्ता यहां 100 रुपये का है, जबकि बाजार में इसकी कीमत 293 रुपये है। प्रॉजोल सोडियम की कीमत इस केंद्र पर 30 रुपये तो दवा की अन्य दुकानों पर 150 रुपये है। नार्थ फ्लाक्सो (दस्त की दवा) के 10 टेबलेट की कीमत 25 रुपये, जबकि बाजार में 80 रुपये है। इसी प्रकार गैस की दवा पेंटा प्राजोल का एक पत्ता यहां 18 रुपये का है जबकि बाजार में इसकी कीमत 80 रुपये है।
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डॉक्टर नहीं लिखते यहां की दवा
जिला अस्पताल में मंगलवार को अपना इलाज कराने पहुंचे राघवेंद्र पांडेय, जयकरन निषाद, महंथ यादव, रामचेत आदि का कहना था कि डॉक्टर जो दवाइयां लिखते हैं वह जन औषधि केंद्र पर नहीं मिलती, बल्कि उसके लिए गेट पर खुली प्राइवेट दुकानों में जाना पड़ता है। जन औषधि केंद्र संचालक का कहना है कि उसके पास जिला अस्पताल की पर्ची वाले बहुत कम लोग ही पहुंचते हैं।
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डॉक्टरों को निर्देशित किया जाएगा : सीएमओ
सीएमओ डॉ. अभय चंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि जन औषधि केंद्र पर जेनरिक दवाइयां मिलती हैं। जो दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं, वह इस केंद्र से खरीदने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जन औषधि केंद्र पर दवाइयां की कमी को दूर कराया जाएगा। इसके अलावा सभी सीएचसी-पीएचसी अधिक्षकों को इस बात के लिए निर्देशित किया जाएगा कि वे ऐसी दवाइयां लिखें, जो जनऔषधि केंद्र पर मिल सकें।
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