रोसेया। एक महीने तक पानी में डूबी होने के बाद भी धान की फसलें बच तो गईं, लेकिन अब कटान तेज होने से इन्हें कच्चा ही काटना पड़ रहा है। मायूस किसान कच्ची फसल को काटकर जानवरों को खिला रहे हैं। नदी कटान करते हुए बांध के किनारे तक पहुंच गई है।
जुलाई महीने के अंतिम सप्ताह में घाघरा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने लगा था। अगस्त महीने में नदी लगातार खतरे के निशान से ऊपर रही। पौली क्षेत्र के हरिवंशपुर, माझा चहोड़ा, खड़कपुर और नारायनपुर में किसानों का खेत नदी के पानी से डूब गया था। महीने भर तक फसलें पानी में डूबी रहने की वजह से खराब हो गईं। अगस्त के अंतिम सप्ताह में जलस्तर कम होने के बाद जो फसलें बच गईं, किसानों को उनसे ही उपज की उम्मीद थी, लेकिन जलस्तर में कमी आने के बाद अचानक नदी ने कटान शुरू कर दी। ग्रामीण मनीराम, हीरालाल, सुरेश, लालमन, लालचंद, हरीराम, रामजतन, महेंद्र, रामदेव, अयोध्या, राधेश्याम, रामनाथ, रामभजन, रामउजागिर, रामचेत, सुभाष, रामजनम, उमेश आदि का खेत का कहना है कि कटान शुरू होने से अब उनकी उपजाऊ जमीन फसल समेत कटकर नदी में विलीन हो रही है। नदी अब बंधे से महज 200 मीटर की दूरी पर बह रही है। कटान के चलते फसलों के भी बह जाने की चिंता से परेशान किसान अब इसे काटकर जानवरों को खिलाने लगे हैं। किसानों का कहना है कि सिंचाई विभाग ने कटान रोकने का कोई प्रबंध नहीं किया है।