संतकबीरनगर। साधन सहकारी समितियों के कर्जदारों को भी कर्जमाफी योजना का लाभ दिए जाने कवायद चल रही है। आलम यह है कि सहकारिता विभाग के जिम्मेदारों के जरिए रुचि नहीं लिए जाने से कार्य की गति काफी सुस्त है। जिले के 7500 किसानों में से अभी तक सिर्फ 48 किसानों की ही खतौनी का सत्यापन हो पाया है। यदि यहीं हाल रहा तो समितियों के कर्जदारों को योजना के लाभ से वंचित हो जाना पडे़गा।
सीडीओ हाकिम सिंह ने बताया कि 31 मार्च 2016 से पूर्व समितियों से ऋण पर खाद, बीज लेने वाले जनपद के 7500 किसानों को भी कर्जमाफी योजना का लाभ दिया जाना है, जिसमें खलीलाबाद तहसील में 2650 किसान, मेंहदावल तहसील में 2336 किसान और धनघटा तहसील में 2556 किसानो को लाभ दिया जाने की प्रक्रिया चल रही है। कर्जमाफी का लाभ दिए जाने के लिए इन किसानों की खतौनी का सत्यापन सहकारिता विभाग के जिम्मेदारों को तहसील के अधिकारियों और कर्मचारियों से मिल कर कराना है। लापरवाही की हद तो यह है कि अभी तक सिर्फ 48 किसानों की खतौनी का ही सत्यापन हो पाया है। शासन स्तर से जो समीक्षा हुई है उसमें संतकबीरनगर डिफाल्टर घोषित हुआ है। यहां एआरकोआपरेटिव और अपर सहकारिता अधिकारी के अलावा अन्य जिम्मेदार कर्जदार किसानों की खतौनी के सत्यापन कराने में सुस्ती बरत रह है। इस मामले को डीएम ने गंभीरता से लिया है। संबंधित विभाग के जिम्मेदारों को निर्देश दिया है कि वह इस कार्य में लग कर तेजी से कराए। यदि कार्य की गति तेज नहीं हुई और शासन की समीक्षा में जनपद पीछे पाया गया तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।