संतकबीरनगर। महिलाओं को अपनी स्थिति बेहतर करने के लिए समाज को दोष देने के बजाय बदलाव की शुरूआत अपने घर से करनी होगी। सबसे पहले हमें घर में बेटी के जन्म पर उत्सव मनाना होगा। यही नहीं, स्वच्छता और नशा उन्मूलन जैसे कार्यक्रमों में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
ये बातें अमर उजाला कार्यालय में महिला सशक्तिकरण पर हुई गोष्ठी में जिले की आदर्श प्राथमिक शिक्षक मीरा भारती ने कहीं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में माताएं अपने बच्चों को स्कूल भेजने में रुचि नहीं दिखा रहीं। बेटी का जन्म होने पर वे ही सबसे पहले दुखी हो जाती हैं। इस मानसिकता में बदलाव केवल कानून बनाने से नहीं हो सकता बल्कि हम सभी को तय करना होगा कि बेटी के जन्म पर भी वैसा ही उत्सव मने जैसे बेटे के जन्म पर मनाया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता सुनीता मोदनवाल ने कहा कि समाज में महिलाओं की स्थिति तभी बदलेगी जब वे आर्थिक रूप से मजबूत बनेंगी। इसके लिए स्वरोजगार पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाने पर जोर दिया।
महिला महासभा की जिला प्रभारी कुसुम चौहान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में शराब पीने की बढ़ती प्रवृत्ति के चलते गरीब परिवारों की महिलाओं को तकलीफें झेलनी पड़ती हैं, लेकिन प्रशासन का सहयोग न मिलने से इस धंधे पर रोक नहीं लग पा रही है। ऐसे में महिलाओं को एकजुट होकर इस समस्या के समाधान के लिए प्रयास करना होगा। गोष्ठी के अंत में सभी ने महिलाओं को जागरूक करने का संकल्प लिया। इस दौरान इंदुमती, राधिका देवी, इसरावती, किरन, गायत्री शर्मा, शशिकला, विमला देवी, कंचन, सुप्रीया राय, छाया शुक्ला आदि मौजूद रहीं।
महिलाएं बोलीं
अभी तय करना है लंबा रास्ता
समाज में महिलाओं की स्थिति में परिवर्तन आ रहा है लेकिन अब भी हमें बहुत लंबा रास्ता तय करना है। अपराजिता जैसे अभियान से जुड़कर महिलाओं की स्थिति में बदलाव लाया जा सकता है।
- विमला सिंह
महिलाएं स्वत: जागरूक हों
समाज की सोच बदलने के लिए इस तरीके के अभियान बहुत प्रभावी होते हैं। महिलाएं जब तक स्वत: जागरूक होकर अपने हक के लिए आवाज बुलंद नहीं करेंगी, उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा। ऐसे कार्यक्रम से जुड़कर अच्छा लगा।
- पूजा चौबे
सार्थक कार्यक्रम होते रहने चाहिए
ग्रामीण महिलाओं की स्थिति बदलने के लिए अपराजिता जैसी मुहिम की जरूरत है। बदलाव लाने के लिए ऐसे कार्यक्रम बहुत सार्थक होते हैं। ग्रामीण महिलाओं में नेतृत्व क्षमता व अभिव्यक्ति के विकास के लिए सार्थक कार्यक्रम होने चाहिए।
- शीला यादव, महिला महासभा
बेटियां बदलाव की कहानी खुद लिखेंगी
शिक्षा और रोजगार के जरिए ही महिलाओं की दशा में बदलाव आएगा। अपराजिता जैसी मुहिम महिलाओं को जागरूक करेगी। उन्हें ऐसा मंच प्रदान करेगी जहां से बेटियां अपने बदलाव की कहानी खुद लिखेंगी। ऐसे अभियान से जुड़ना सुखद रहा।
- शकुंतला