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एक नवम्बर से शुरू होनी है धान खरीद

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किसानों का पंजीकरण सुस्त, मिलर भी हड़ताल पर
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जिले में इस वर्ष 45 हजार मीट्रिक टन होनी है धान की खरीद
अभी तक केवल 2700 किसानों का ही हुआ है पंजीकरण
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। एक नवंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू होनी है। केंद्र खोलने के साथ ही बोरों के भी इंतजाम कर लिए गए हैं, लेकिन असल बात यह है कि अभी तक किसानों ने इसमें बहुत रूचि नहीं दिखाई है। अब तक केवल 2700 किसानों का ऑनलाइन पंजीकरण हुआ है। इसके अलावा खरीद में सबसे बड़ी बाधा मिलरों की तरफ से है। हड़ताल के चलते किसी भी मिलर से एग्रीमेंट ही नहीं हो पाया है।
जिले में इस वर्ष 93186 हेक्टेयर खेत में धान बोई गई है। धान का औसत अनुमानित उत्पादन 21.06 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। शासन ने 45 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है। इसके लिए खाद्य विपणन विभाग को आठ, पीसीएफ को 29 और यूपी एग्रो को एक क्रय केंद्र आवंटित हुआ है। यहां तक तो सब ठीक है, लेकिन असल दिक्कत इसके आगे शुरू हो रही है। सरकार ने धान खरीद में गड़बड़ी रोकने के लिए किसानों का पहले ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए 30 अक्तूबर तक का समय निर्धारित था, लेकिन पंजीकरण की रफ्तर बेहद सुस्त है। अब तक करीब 2700 किसानों ने ही पंजीकरण कराया है। मेंहदावल क्षेत्र में पांच सौ किसानों का पंजीकरण नहीं हो पाया है। खलीलाबाद तहसील में करीब एक हजार किसानों का पंजीकरण हो पाया है। पंजीकरण नहीं होने पर धान की खरीद भी प्रभावित होगी। लिहाजा शासन ने पंजीकरण की तारीख 15 नवंबर तक बढ़ा दी है। इसके अलावा मिलर भी हड़ताल पर हैं। इससे खरीदे गए धान की कुटाई को लेकर दिक्कत आएगी। जब तक धान मिलर को नहीं जाएगा, खरीद की रफ्तार नहीं बढ़ेगी।
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जिद पर अड़े मिलर, विभाग कर रहा इंतजार
हर साल सरकारी एजेंसियों की तरफ से खरीद गए धान को खाद्य विपणन विभाग में पंजीकृत राइस मिल मालिक कुटाई के लिए ले जाते हैं। परंतु इस बार विवाद चल रहा है। मामला यह है कि मिलर प्रति क्विंटल 62 किलोग्राम चावल देने की बात कह रहे हैं जबकि सरकार 67 किलोग्राम चावल की आपूर्ति चाहती है। दूसरा बड़ा मामला चावल की क्वालिटी को लेकर है। जिले में जो 13 मिलर है उनमें से कई के पास ड्रायर व अत्याधुनिक तकनीकी नहीं है। दिसंबर-जनवरी में जब धान की खरीद व कुटाई का कार्य तेजी पर होगा तब मिलरों के सामने नमी व डैमेज (टूटा चावल) की समस्या रहेगी। इन मिलरों का चावल एफसीआई के मानक पर खरा नहीं उतरेगा। लिहाजा जब किसान अपना धान बेंचने के लिए लाइन में खड़ा होगा, तब विभाग बोरा व गोदाम खाली होने का इंतजार कर रहा होगा।
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समस्या जल्दी सुलझने की है उम्मीद
डिप्टी आरएमओ रामानंद का कहना है कि पहले हफ्ते में खरीद सुस्त रहती है इसलिए मिलरों के हड़ताल से ज्यादे दिक्कत नहीं आएगी। तब तक सरकार इस मामले का हल निकाल लेगी। स्त्रित्त्कसानों के पंजीकरण की गति बढ़ रही है। प्रयास है कि एक नवम्बर को पहले ही दिन जिले में अच्छी खरीदारी की जाए।
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