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भक्ति के भाव से ही भगवान की प्राप्ति है : पवन शास्त्री

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रामकथा सुनते लोग - फोटो : अमर उजाला
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बखिरा (संतकबीरनगर)। क्षेत्र के कस्बा बखिरा के गल्लामंडी में चल रहे श्रीरामकथा के सातवें दिन श्रद्धालु भक्ति के भवसागर में गोता लगाते रहे। व्यासपीठ पवनदास शास्त्रीजी ने पत्थर पूजने के रहस्य को श्रद्धालुओं को समझाते हुए भगवान के कण-कण में वास करने की बात कही। प्रसंगानुसार हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान की भक्ति में लीन रहता था। हिरण्यकश्यप इससे नाराज होकर प्रह्लाद को मारने के लिए तरह-तरह का जुगत लगाया। पहाड़ से धक्का देना, नदी में डालना, हाथी से कुचलवाना व आग में जलाने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन ईश्वर की भक्ति के प्रभाव से प्रह्लाद को मारने का सभी प्रयास विफल होता रहा। प्रह्लाद बार-बार कहते है कि भगवान कण-कण में वास करते है। हिरण्यकश्यप के मद को चूर करने के लिए प्रह्लाद के पुकारने पर भगवान विष्णु नरसिंह के रूप में पत्थर के खंभे को फाड़कर निकलते है, इसके बाद हिरण्यकश्यप का वध करते है।पवनजी शास्त्री ने कहा कि कथा का आशय है कि भगवान इस ब्रह्मांड के कण-कण में विराजमान है। इसी वजह से भारत देश में अमूमन प्रत्येक चीज की अलग-अलग रूपों में मान्यतानुसार पूजा की जाती है। पत्थर की पूजा के पीछे भी ऐसी ही मान्यता है। हिन्दू परंपरानुसार सजीव के साथ ही हम निर्जीव वस्तुओं में भी ईश्वर का अंश मानकर पूजा की जाती है। इसी वजह से हिन्दू समुदाय द्वारा पत्थर, पहाड़, वृक्ष, चंद्रमा, सूरज, नदी समेत दर्जनो प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं की पूजा की जाती है। इस अवसर पर राम कुमारदासजी शास्त्री-दिव्य शीश महल अयोध्या, समिति अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश कसेरा, ओमप्रकाश सिंह, हीरालाल गुप्ता, महादेव कसेरा जामवंत, रामसरन वर्मा, पवन कसेरा, ओमप्रकाश तिवारी, मुरलीधर गुप्ता, राजेश सिंह, हरेंद्र गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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