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सातवीं बार मैदान में उतरे भालचंद यादव
इससे पहले पांच बार सपा से और एक बार बसपा से लड़ चुके हैं चुनाव
वर्ष 1999 में सपा से और 2004 में बसपा के टिकट पर बने थे सांसद
वर्ष 1984 के बाद कांग्रेस को पहली जीत दिलाने की है जिम्मेदारी
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। सपा, बसपा के बाद अब कांग्रेस में शामिल भालचंद यादव संतकबीरनगर लोकसभा क्षेत्र से सातवीं बार चुनाव लड़ेंगे। वर्ष 1998 से वह लगातार इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। दो बार सांसद रह चुुके भालचंद यादव ने एक बार सपा के टिकट पर तो दूसरी बार बसपा के टिकट पर जीत हासिल की थी। जहां तक कांग्रेस की बात है तो इस सीट पर उसे आखिरी बार वर्ष 1984 में जीत मिली थी। तब उसकी ओर से चंद्रशेखर त्रिपाठी मैदान में थे।
खलीलाबाद ब्लॉक के भगता निवासी भालचंद ने पहला लोकसभा चुनाव वर्ष 1998 में सपा के टिकट पर लड़ा था। 1999 में हुए चुनाव में सपा के टिकट पर ही वह दुबारा मैदान में आए और पहली बार जीतकर संसद में पहुंचे परंतु बाद में अनबन होने पर वह बसपा में शामिल हो गए। वर्ष 2004 का लोकसभा चुनाव उन्होंने बसपा के टिकट पर लड़ा और जीत पाई। दो वर्ष बाद ही वे वापस सपा में शामिल हो गए और इस सीट से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वर्ष 2007 में हुए उप चुनाव में सपा के टिकट पर लडे, लेकिन हार हुई। वर्ष 2009 और 2014 का चुनाव भी उन्होंने सपा के टिकट पर लड़ा। इस बार वह कांग्रेस के टिकट पर किस्मत आजमा रहे हैं। पिछले चुनाव में यहां कांग्रेस को सिर्फ 22 हजार वोट ही मिले थे।
अब तक सीधा माना जा रहा मुकाबला होगा त्रिकोणीय
कांग्रेस ने सपा के पूर्व सांसद भालचंद का दलबदल कराके संतकबीरनगर सीट के राजनैतिक समीकरण को उलट-पुलट दिया है। अब तक लड़ाई से बाहर मानी जा रही कांग्रेस अचानक चर्चा में आ गई है। रिटायर प्रधानाचार्य हीरालाल त्रिपाठी व चंद्रप्रकाश शर्मा भी अब इस सीट पर कांटे की टक्कर मान रहे हैं।
स्थानीय बनाम बाहरी का दिया नारा
नामांकन दाखिल करने के साथ ही कांग्रेस उम्मीदवार भालचंद ने स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा गरमाना शुरू कर दिया है। वजह यह है कि भाजपा उम्मीदवार प्रवीण निषाद और बसपा उम्मीदवार भीष्मशंकर उर्फ कुशल तिवारी गोरखपुर के निवासी हैं। नामांकन कक्ष के बाहर निकलते ही पत्रकारों से बातचीत में भालचंद ने कहा कि जब इस संसदीय क्षेत्र का व्यक्ति सांसद बनेगा तभी स्थानीय समस्याओं का समाधान होगा।