टिकट के लिए लखनऊ-दिल्ली का काट रहे चक्कर
- संतकबीरनगर सीट पर बीजेपी से घोषित नहीं हुआ उम्मीदवार
- शरद त्रिपाठी समेत कई लोग हैं दावेदार, निर्णय करेगा शीर्ष नेतृत्व
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जूता कांड के बाद देश भर में चर्चा में आए संतकबीरनगर लोकसभा सीट पर उम्मीदवार का चयन भाजपा के शीर्ष नेताओं के लिए भी मुसीबत बन गया है। वर्तमान सांसद शरद त्रिपाठी समेत आधा दर्जन से अधिक दिग्गज यहां से दावेदारी जता रहे हैं। अपना टिकट कन्फर्म करने के लिए कुछ लोग दिल्ली दरबार में हैं तो कुछ लखनऊ। स्थानीय स्तर पर भी कार्यकर्ता लगातार उम्मीदवारों की घोषणा पर नजर गड़ाए हुए हैं। भाजपा का उम्मीदवार तय नहीं होने के चलते विपक्षी दलों का प्रचार अभियान भी जोर नहीं पकड़ रहा।
सांसद शरद त्रिपाठी व मेंहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच बीते छह मार्च को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई मारपीट के बाद संतकबीरनगर सीट अचानक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गई। लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही यहां भाजपा की तरफ से उम्मीदवार कौन होगा इसको लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गईं। भाजपा की जैसे ही कोई लिस्ट जारी होती है लोगों की पहली उत्सुकुता संतकबीरनगर सीट को लेकर होती है। पिछले सप्ताह गोरखपुर में संघ व भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों की हुई बैठक में नाम तय होने की चर्चा थी लेकिन दावेदारों की संख्या और उम्मीदवार की घोषणा के बाद होने वाले विरोध को ध्यान में रखते हुए पदाधिकारी एकमत नहीं हो पाए। बस्ती मंडल की तीन में से दो सीट पर भाजपा ने उम्मीदवार घोषित कर दिया लेकिन संतकबीरनगर सीट पर अभी भी चर्चाएं चल रही हैं। इसको देखते हुए टिकट की दावेदारी में लगे कई नेता लखनऊ व दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो एक प्रबल दावेदार ने मंगलवार को अमित शाह से मुलाकात कर अपनी उम्मीदवारी और चुनाव जीतने की संभावना के विषय में बताते हुए आशीर्वाद मांगा। इससे पहले दूसरे दल के एक पूर्व सांसद भी अमित शाह से मिल चुके हैं। हालांकि अभी किसी का नाम फाइनल नहीं हो पाया है। इस बीच यह भी चर्चा है कि पार्टी यहां से अपने वर्तमान सांसद या फिर उनके परिवार के किसी सदस्य को भी उम्मीदवार बना सकती है। हालांकि इस मामले पर संगठन के पदाधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
जिलाध्यक्ष सेतवान राय का कहना है कि इस सीट पर उम्मीदवार कौन होगा इसका निर्णय केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। जो लोग चुनाव लड़ने में सक्षम हैं उन्हें दावेदारी करने का पूरा हक और वे अपनी दावेदारी जता भी रहे हैं। नेतृत्व जिसका नाम तय करेगा, सभी दावेदार भी उसका प्रचार करेंगे।