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प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना का हाल

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कर्ज ले रहे किसान, लाभ पा रही बीमा कंपनी
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जिले में इस वर्ष खरीफ सीजन में 32904 किसानों का हुआ था फसल बीमा
इनके केसीसी खाते से कट गया बीमा का प्रीमियम, क्षतिपूर्ति किसी को नहीं मिली
पिछले वर्ष रबी में 2186 और खरीफ में 186 किसानों को ही मिली क्षतिपूर्ति
किसानों को नहीं मिलता बीमा का प्रमाण पत्र, क्षतिपूर्ति भी नहीं मिलती
उदयभान त्रिपाठी
संतकबीरनगर। किसानों के लिए वरदान बताई जा रही प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना असल में तो बीमा कंपनी को लाभ पहुंचा रही है, लेकिन किसान के केसीसी खाते से ऋण लेते ही स्वत: फसल बीमा का प्रीमियम कट जाता है। बदले में किसान को कोई पत्र तक नहीं मिलता। क्षतिपूर्ति देने की प्रक्रिया भी इतनी जटिल है कि कुछ चुनिंदा किसानों को ही इसका लाभ मिल रहा है। पिछले वर्ष रबी में 2186 और खरीफ में 186 किसानों को ही लाभ मिला। जबकि बीमा कंपनी को सिर्फ किसानों के प्रीमियम के तौर पर तीन करोड़ से ज्यादा मिला। इसमें केंद्र व राज्य का अंश अलग है।
भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव घोषणा पत्र में किसानों को उद्योगपतियों की तरह बीमा सुरक्षा का वादा किया था। सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू भी की। इस योजना के तहत प्रत्येक किसान की ओर से बोए गए फसल के औसत उत्पादन के हिसाब से बीमा का प्रीमियम तय किया गया था। खरीफ की फसलों के लिए बीमा प्रीमियम दो प्रतिशत तथा रबी की फसल के लिए डेढ़ प्रतिशत है। नकदी व बागवानी फसल के लिए प्रीमियम की दर पांच प्रतिशत है। कृषि विभाग के आंकड़े के अनुसार जिले में दो लाख 26 हजार किसान हैं। वर्ष 2017-18 के खरीफ सीजन में 25661 किसानों के बैंक खातों (केसीसी खाता) से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रीमियम के तौर पर एक करोड़ 97 लाख 16 हजार रुपये बीमा कंपनी को ट्रांसफर किया गया। केद्रांश व राज्यांश मिलाकर कंपनी को चार करोड़ 32 लाख 90 हजार रुपये मिले। जबकि फसल खराब होने पर सिर्फ 2186 किसानों को 89 लाख 39 हजार रुपये मिले। रबी सीजन के लिए 18053 किसानों के खाते से प्रीमियम के तौर पर एक करोड़ 25 लाख 27 हजार 13 रुपये का प्रीमियम भरा गया, लेकिन फसल खराब होने पर केवल 186 किसानों को ही क्षतिपूर्ति के रूप में दो लाख 27 हजार रुपये का भुगतान किया गया। इस वर्ष खरीफ सीजन के लिए 32904 किसानों की फसल का बीमा करते हुए प्रीमियम के तौर पर दो करोड़ 63 लाख सात हजार 606 रुपये का प्रीमियम भरा है। जबकि अब तक एक भी किसान को क्षतिपूर्ति नहीं मिला।
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सात वर्ष के औसत उत्पादन से कम पर मिलेगा फायदा
जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा का कहना है कि इस योजना के तहत किसानों की फसल का बीमा होना है, लेकिन अब तक सिर्फ केसीसी खाते से ऋण लेने पर ही प्रीमियम कट रहा है। गैर ऋणि किसान भी कामन सर्विस सेंटर से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। किसानों को क्षतिपूर्ति देने के लिए न्याय पंचायत को इकाई माना गया है। प्राकृतिक आपदा से बर्बाद फसल का आकलन करने के लिए कृषि, राजस्व व बीमा कंपनी के कर्मचारियों की संयुक्त टीम करती है। सात वर्ष के औसत उत्पादन से कम उत्पादन रहने पर ही क्षतिपूर्ति मिलती है। फसल की बुवाई फेल होने पर तत्काल 25 प्रतिशत तथा मध्यकाल में फसल बर्बाद होने पर भी क्षतिपूर्ति मिलती है।
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बीमा प्रमाण पत्र के लिए कहा गया है : डीडीएजी
उप कृृषि निदेशक लोकेेंद्र सिंह के अनुसार किसान दिवस पर यह मुद्दा उठा था। किसानों ने मांग रखी थी कि उन्हें बीमित फसल के विषय में जानकारी के लिए प्रमाण पत्र बीमा कंपनी की तरफ से दिलाया जाए। इस पर डीएम ने अपने स्तर से बीमा कंपनी से बीमित किसानों की सूची तथा बीमा प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने को कहा है। बीमा कंपनी के अधिकारी ने जल्द ही प्रपत्र उपलब्ध कराने की बात कही है।
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