घाघरा की कटान से सहमे लोग, घर छोड़नेे की तैयारी में जुटे
गायघाट, ढोलबाजा, गुनवतिया, भौवापार, चकदहा, सुअरहा समेत कई गांव नदी की जद में
अमर उजाला ब्यूरो
हैंसर। घाघरा नदी की कटान अनवरत जारी है। रोजाना सैकड़ों बीघा खेती योग्य भूमि को काटती हुई नदी गांव की ओर बढ़ती जा रही है। नदी का रुख देख सहमें गांव के लोग घर छोड़ने की तैयारी करने लगे हैं। गांववालों का कहना है कि यदि सरकार सुरक्षित स्थान पर जमीन मुहैया करा देती तो प्रति वर्ष उजड़ने-बसने की झंझट से निजात मिल जाती।
घाघरा नदी करीब एक माह से कटान करती हुई अपने मुख्य धारा को छोड़ते हुए उत्तर की दिशा में बढ़ती जा रही है। नदी की कटान से अब तक किसानों की सैकड़ों बीघा खेती व फसल धारा में विलीन हो गई है। गायघाट, ढोलबजा, गुनवितया, भौवापार, चकदहा, सुअरहा, दौलतपुर समेत कई गांव नदी की कटान की जद में आ गए हैं। गांव के लोगों की मानें तो कटान के पहले नदी इन गांवों से दो से ढाई किलोमीटर की दूरी पर बह रही थी। लेकिन गांव और नदी के बीच कहीं एक किलोमीटर तो कहीं पांच सौ मीटर का फासला रहा गया है। कटान प्रतिदिन हो रही है। इससे जमीन नदी में समाती जा रही है। सुरेश मौर्य, धीरेंद्र यादव, रुद्रप्रताप, गंगा, रामचेत, रामकिशुन, लालचंद निषाद, रामदरश आदि का कहना है कि कटान के कारण गायघाट समेत कई गांवों को खतरा उत्पन्न हो गया है। कटान इसी तरह हुई तो गांव नदी के धारा में विलीन हो जाएंगे। उसके बाद कहा रहेंगे समझ से परे है। गांववालों ने कहा कि सरकार तुर्कवलिया नायक, भिखारीपुर, अशरफपुर के लोगों की तरह हमें भी कहीं जमीन देकर बसा दें तो बहुत ही अच्छा होगा। लेकिन प्रशासन के लोग केवल कई वर्षों से जमीन देने की सिर्फ बात करते चले आ रहे हैं और मांझा के लोग प्रति वर्ष उजड़ने व बसने को विवश है। दूसरी तरफ एसडीएम बाबूराम ने कहा कि यदि नदी के तलहटी में घर बना कर रहने वाले गांव के लोग बंधे के उत्तर आने को तैयार हैं तो प्रशासन उन्हें जमीन मुहैया का कराने का काम करेगा।