स्वाइन फ्लू को देखते हुए जिले में प्रवासी पक्षियों की होगी निगरानी
- पंचायतीराज, सिंचाई, वन, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी निगरानी पर करेंगे चर्चा - शासन के निर्देश पर पशुपालन विभाग ने चार जनवरी को बुलाई बैठक
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। दूर देश से आने वाले पक्षियों के कारण जिला स्वाइन फ्लू को लेकर संवेदनशील है। प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पशुपालन विभाग को जिम्मेदारी दी है। इसे लेकर तैयारी भी शुरू हो गई है। प्रवासी पक्षियों पर निगरानी के लिए चार जनवरी को पंचायतीराज, सिंचाई, वन, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक होगी। जिसमें सावधानी के साथ ही आपात स्थिति से निपटने की रणनीति भी बनाई जाएगी।
स्वाइन फ्लू ज्यादातर पक्षियों से फैलता है। जिले के बखिरा झील में हर साल जाड़े के दिनों में करीब 30 हजार पक्षी विभिन्न देशों से आते हैं। बखिरा झील 29 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। जिसकी निगरानी वन विभाग के जिम्मे है। दूसरे देशों से आ रहे पक्षियों में स्वाइन फ्लू जैसी बीमारी को देखते हुए जिले को संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है। इसके लिए पशुपालन विभाग को निगरानी का जिम्मा दिया गया है। पशुपालन विभाग पक्षियों पर निगरानी करेगा और देखेगा कि किसी पक्षी में कही स्वाइन फ्लू तो नहीं है अगर है तो जरूरी कार्रवाई की जाएगी। पशुपालन विभाग ने इससे निपटने के लिए और इस पर चर्चा के लिए पंचायतीराज, सिंचाई, वन, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को शामिल किया है। जिसमे प्रवासी पक्षियों की निगरानी के उपायों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा जरूरी सुरक्षात्मक उपाय किए जाएंगे।
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विदेशों से आने वाली पक्षियां
लालसर, डुबडूबी, जलकौआ, सिलेटी अंजन, लाल अंजन, गेाई लाल, गोई, रंगीन जांघिल, काला जांघिल, सफेद बाज, काला बाज, सवन, सुर्खाव, कपासी चील, बडा गरुण, नील सर, सारस, ताल मखानी, पीली टिटिहरी, हुदहुद जैसे अनेक तरह के पक्षियां आती है।
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बखिरा झील में विदेशी पक्षियां आती हैं। इस लिहाज से स्वाइन फ्लू को देखते हुए जिला संवेदनशील है। पक्षियों पर निगरानी के लिए टीम बनाई गई है। जिसमें पंचायतीराज, सिंचाई, वन, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को शामिल किया गया है। टीम की बैठक चार जनवरी को डीएम की अध्यक्षता में होगी। जिसमें पक्षियों पर निगरानी के लिए चर्चा की जाएगी।
- डॉ टीपी मिश्र, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।