हैंसर। घाघरा नदी के जल स्तर में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। नदी का पानी दियारे में फसलों को डुबोतेे हुए गांवों के करीब पहुंचने लगा है। गुुरुवार की सुबह कुर्मियान टोला के बगल स्थित नाले में नदी का पानी गिरने से गांव वालों में दहशत है। गांव के लोगों का कहना है कि नाला भरते ही नदी का पानी गांव में घुस जाएगा। जिससे पूरे गांव के लोग घर छोड़ने पर विवश हो जाएंगे।
लगातार हो रही बारिश से घाघरा नदी के जल स्तर में लगातार बढ़ोत्तरी जारी है। हालांकि तुकर्वलिया नायक में अभी नदी खतरे के निशान से नीचे है। पानी दियारा में फैलता जा रहा है। गांव वालों का कहना है कि बाढ़ का पानी दियारा में फसलों से ऊपर बहने लगा है।
इससे फसल बर्बाद होने की आशंका प्रबल होती जा रही है। गुरुवार को एमबीडी बांध के दक्षिण बसे छपरा मगर्बी गांव के कुर्मियान टोला से सट कर गए नाले में बाढ़ का पानी तेजी के साथ गिरने लगा।
इससे ग्रामीण भयभीत हो गए हैं। रामप्रसाद चौधरी, देवेंद्र यादव, लंला, चंदू यादव, जयराम आदि का कहना है कि नाला उफनाते ही गांव में बाढ़ का पानी घुस जाएगा। इससे यहां बसे अस्सी परिवार घर छोड़ने को विवश हो जाएंगे।
उधर, गायघाट गांव के पास नदी का कटान जारी है। नदी कटान करते हुए भौंवापार गांव के करीब पहुंचती जा रही है। सिंचाई विभाग के जेई मनोज त्रिपाठी ने कहा कि घाघरा का जल स्तर अभी तुर्कवलिया नायक में खतरे के निशान के नीचे है। एसडीएम बाबूराम ने बताया कि नदी के जल स्तर में हो रही बढ़ोत्तरी को देखते हुए पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
करमैनी-बेलौली तटबंध को पांच भागों में बांटकर की जा रही है निगरानी
मेंहदावल। तहसील क्षेत्र के पूर्वी कछार क्षेत्र के लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए करमैनी-बेलौली तटबंध को पांच भागों में बांटकर निगरानी की जा रही है। कछार क्षेत्र के छपिया अगंद के अजय तिवारी ने कहा कि यदि राप्ती नदी उफनाई तो तटबंध को सुरक्षित रखना चुनौती होगी।
घूरापाली के अनिल निषाद ने कहा कि राप्ती नदी में उफान नेपाल के बानगंगा नदी के बैराज से पानी छोड़ने पर होता है। यदि नेपाल ने बानगंगा बैराज से पानी छोड़ दिया तो समस्या खड़ी हो सकती है।
कछार के नौंगो, जोरवा, थरौली, विशुनपुरबांगर,बेलौली, खैरहवां आदि जगहो पर तटबंध से सटकर नदी बह रही है। इससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। कुसौनाकलां के अनिल तिवारी ने कहा कि खैरा, नगपुर, डुमरिया बाबू, बानडूमर, बढ़या, इंदरपुर, विशुनपुर बांगर, जोरवा, नौगों राप्ती के मुहाने पर बसे हैं। यदि राप्ती नदी का दबाव तटबंध पर पड़ा तो कछारक्षेत्र के सैकड़ों गांवों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है।
जेई वीरेंद्र यादव ने कहा कि 19.2 किमी लंबे तटबंध की मरम्मत व बचाव की जिम्मेदारी ड्रेनेज खंड द्वितीय संतकबीरनगर के ऊपर है। तटबंध के रखरखाव के लिए इसको शून्य से 3.6 किमी, 3.6 से 7.5 किमी, 7.5 से 10.50 किमी, 10.50 से 14.03 किमी और 14.03 से 19.2 किमी तक पांच भागों में बांटा गया है। बंधे पर नजर रखी जा रही है।