कार्यदाई संस्था की लापरवाही कहें या फिर शासन से बजट मिलने में देरी। जो भी हो सूडा के तहत हरिहरपुर में अब 252 की बजाय 144 आवास ही बनेंगे। इससे 108 गरीबों को आवास से महरूम होना पड़ेगा। वहीं कलेक्ट्रेट के अफसरों और कर्मचारियों के लिए बनाए जा रहे आवास की लागत पांच गुना बढ़ गई।
राज्य शहरी विकास अभिकरण के जरिए नगर पंचायत हरिहरपुर में वर्ष 2007 में 252 गरीबों के लिए 8.50 करोड़ की लागत से आवास बनाए जाने की स्वीकृति मिली थी। वर्ष 2011 में कार्यदाई संस्था यूपी प्रोजक्ट कारपोरेशन को 3.82 करोड़ रुपये मिले थे। जबकि दिसंबर 2015 में एक करोड़ 20 लाख की धनराशि और मिली थी। समय बढ़ने के साथ ही साथ रिवाइज बजट में इसकी लागत बढ़ कर 13 करोड़ हो गई। मार्च 2016 तक ही आवास पूर्ण करके गरीबों को आवंटित कर देना था, लेकिन अभी तक निर्माण पूरा नहीं हो पाया है।
बाद में शासन ने 31 दिसंबर तक का समय बढ़ा दिया था, लेकिन कार्यदाई संस्था की लापरवाही गरीबों के सपने पर भारी पड़ी। अब शासन ने सिर्फ 144 आवास के लिए ही बजट देने की बात कही है, जबकि 252 आवास बनाए जाने थे। इसी तरह कलेक्ट्रेट के अफसरों और कर्मियों के लिए आवास निर्माण और बाउंड्रीवाल निर्माण की जिम्मेदारी यूपी प्रोजक्ट कारपोरेशन को मिली है। कर्मचारियों के लिए 50 आवास बनने हैं।
वर्ष 2005 में इसकी लागत पांच करोड़ थी और वर्ष 2007 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। वर्ष 2009 में बजट रिवाइज हुआ और वर्ष 2011 में बजट 16 करोड़ पहुंच गया। अभी बजट रिवाइज होने की बात कार्यदाई संस्था बता रही है, उसके बाद लागत 24 करोड़ हो जाएगी। यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन के सहायक परियोजना प्रबंधक के एस ओझा ने बताया कि हरिहरपुर में 144 आवास बनने है। कारण कि शासन ने इतने ही आवासों के लिए रकम दी है।
शेष रकम देने से इंकार कर दिया है। जुलाई 2017 तक निर्माण कार्य पूरा कर दिया जाएगा। आवंटियों को कनेक्शन देने में मदद करने के लिए ईओ नगर पंचायत से पत्राचार किया गया है। जहां तक कलेक्ट्रेट आवास का सवाल है तो 31 मार्च 2017 तक उसे भी पूरा करके हैंडओवर कर दिया जाएगा। एडीएम के पी यादव ने बताया कि आवास निर्माण की गुणवत्ता पर पूरा जोर है। गुणवत्ता में किसी स्तर पर कमी नहीं होने की हिदायत कार्यदाई संस्था के जिम्मेदारों को दी गई है। समय- समय पर निरीक्षण करके कार्य की गुणवत्ता जांची भी जाती है।
नगर पंचायत हरिहरपुर के चेयरमैन आशा देवी ने बताया कि यह सच है कि बजट नहीं मिलने से 108 गरीब आवास पाने से वंचित रह गए हैं। आसरा योजना के तहत नगर में 413 और आवास निर्माण कराने के लिए प्रस्ताव तैयार करा कर शासन को भेजा गया है। उम्मीद है जल्द ही स्वीकृति के साथ बजट भी आवंटित हो जाएगा। गरीबों को निराश होने की जरूरत नहीं है। डीएम ने कुछ समय पूर्व आवासों का निरीक्षण भी किया था तो उस दौरान कार्यदाई संस्था के जिम्मेदारों को सख्त हिदायत दी थी कि सूडा के तहत बनाए जा रहे आवास के निर्माण को दिसंबर 2016 तक हर हाल में पूरा करके लाभार्थियों को दे दिया जाए।