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केंद्रीय बजट पर विभिन्न वर्ग के लोगों की प्रतिक्रिया--

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अंतरिम बजट से जख्म पर मरहम लगाने की कोशिश
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छोटे किसानों ने बताया किसानों के अनुकूल
कर्मचारी आयकर सीमा बढ़ने से खुश, लेकिन पुरानी पेंशन योजना शुरू नहीं होने से दुखी
आम लोगों ने बजट को समयानुकूल बताया
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। केंद्र सरकार के अंतरिम बजट पर अलग-अलग वर्गों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आई है। सब इसे जख्म पर मरहम लगाने वाला बता रहे हैं। कर्मचारी आयकर की सीमा बढ़ने से खुश हैं तो पुरानी पेंशन व्यवस्था का जिक्र नहीं होने से दुखी भी हैं। लघु एवं सीमांत किसान भी बजट को अनुकूल बता रहे हैं। आम लोग समयानुकूल बता रहे हैं।
किसान त्रियुगी नारायण का कहना है कि यह पहली सरकार है, जिसने किसानों के लिए सोचा है। लघु एवं सीमांत किसानों के लिए बजट में प्रावधान कर सरकार ने खेती से मुंह मोड़ चुके युवाओं को प्रभावित करने का प्रयास किया है। यह सराहनीय कदम है। अधिवक्ता रुद्रसेन पांडेय का कहना है कि निजी आयकर दाताओं को छूट और बचत करने पर आयकर स्लैब परिवर्तन से मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी। इसका असर उनके जीवन स्तर पर भी पड़ेगा। कुल मिलाकर यह जख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास है।
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शिक्षक रामचंद्र शुक्ल ने कहा कि निजी आयकर स्लैब बढ़ाकर पांच लाख रुपये किए जाने से कर्मचारियों को राहत मिलेगी। वेतन बढ़ोत्तरी के बाद इस स्लैब में वृद्घि की उम्मीद पिछले कई बजट से थी जो इस बार पूरी हुई है हालांकि पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू नहीं होने से नए कर्मचारियों में निराशा है। व्यापारी भूपेंद्र चौधरी का कहना है कि बजट में व्यापारियों के लिए कुछ खास तो नहीं है लेकिन बचत के लिए आयकर स्लैब में परिवर्तन का लाभ व्यापारियों को भी मिलेगा। सरकार का बजट आगामी चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। युवा रामू का कहना है कि सरकार ने सबके लिए कुछ न कुछ जरूर दिया है, लेकिन रोजगार के नए साधनों के विकास पर बहुत जोर नहीं देना आश्चर्यजनक है। बजट में जो प्रावधान किए गए हैं वे हकीकत बने तो अच्छा रहेगा।
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गृहिणी अनीता वर्मा का कहना है कि इस बार के अंतरित बजट में महिलाओं के लिए कुछ खास नहीं है। सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के स्वास्थ्य व उज्जवला योजना की चर्चा तो की है लेकिन शहरी महिलाओं का जिक्र तक नहीं है। सरकार को महिलाओं की आर्थिक उन्नति के लिए भी अलग से प्रावधान करना चाहिए था।
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