हैंसर (संतकबीरनगर)। शौचालय निर्माण का हकीकत जानने के लिए डीएम के नियुक्त किए गए जांच अधिकारी शुक्रवार से जांच का काम प्रारंभ कर दिए। जांच अधिकारी गांव में पहुंच कर निर्मित व निर्माणाधीन शौचालयों की गिनती कर रहे हैं तो शौचालयों के निर्माण में हेराफेरी करने वालों के माथे पर पसीना आने लगा है। जांच अधिकारियों से मन माफिक रिपोर्ट लगवाने के लिए गणेश परिक्रमा होने लगी है। गांवों को स्वच्छ व साफ बनाने के उद्देश्य से सरकार ने गांव के हर घर में शौचालय बनवाने का लक्ष्य रखकर जून तक शौचालय बनाने की जिम्मेदारी प्रधान व सचिव को देकर उनके खाते में धन भेजती रही। उसके बाद अब सीधे लाभार्थियों के खातों में धन मुहैया कराया जाने लगा है। दो अक्तूबर को प्रदेश को ओडीएफ घोषित करने व शौचालयों का निर्माण युद्ध स्तर होने की बात अधिकारी करते रहे, लेकिन ऐने मौके शासन ने अपने निर्णय में परिवर्तन करते हुए बनवाए गए शौचालयों का सत्यापन कराने का फरमान जारी कर दिया। जिसके तहत जांच शुरु की गई है। सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2016-17 व 2017-18 में ओडीएफ घोषित किए गांवों में शौचालयों का शत प्रतिशत निर्माण नहीं हो सका है। तमाम शौचालय अभी भी आधे अधूरे पड़े हुए है। अब जब गिनती शुुरू हुई है तो सही काम न करने वालों को परेशानी होने लगी है।
इस संबध में एडीओ पंचायत शिवकुमार तिवारी ने कहा कि जांच हो रही है। जांच पूर्ण होने के बाद ही इस संबंध में कुछ कहा जा सकता है।