मगहर में बंद पड़ी सूती कताई मिल।
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संतकबीरनगर। अरसे से बंद संतकबीर सहकारी कताई मिल मगहर की नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। तीन दिन पूर्व लखनऊ में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है। जैसे कानपुर की इटावा स्थित कताई मिल के भवन की खुली निविदा के माध्यम से नीलामी हुई थी, उसी तर्ज पर संतकबीर सहकारी कताई मिल की नीलामी होगी।
विधानसभा की सरकारी आश्वासन संबंधित समिति की दो मई 2018 को हुई बैठक में मगहर कताई मिल के श्रमिकों के बकाया भुगतान का मुद्दा उठा था। समिति के जरिए इस मुद्दे पर दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसी क्रम में 27 जुलाई को आयुक्त एवं निदेशक/निबंधक, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग सहकारी समितियां कानपुर/अपर मुख्य सचिव, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग की अध्यक्षता में लखनऊ में बैठक हुई थी। डीएम भूपेंद्र एस. चौधरी ने बताया कि मगहर कताई मिल की परिसंपत्तियों भूमि, भवन, प्लांट एवं मशीनरी आदि का मूल्यांकन करने के लिए वैलुअर की नियुक्ति प्रक्रिया एक माह के अंदर किए जाने का निर्देश मिला है। दो माह के अंदर वैलुऐशन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। वैलुएशन की प्रक्रिया सरकारी विभाग एवं ख्याति प्राप्त अधिकृत वैलुअर से कराई जाएगी। तीन माह के अंदर बिड डॉक्यूमेंट तैयार कर बिडिंग प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बिडिंग प्रोसेस के लिए पूर्व में उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल्स संघ लि. कानपुर की इटावा स्थित कताई मिल के भवन की खुली निविदा के माध्यम से की गई नीलामी प्रक्रिया का भी अध्ययन किया जाएगा। इस काम के लिए एडीएम को जिम्मेदारी दी गई है। एडीएम रणविजय सिंह ने बताया कि मगहर कताई मिल की नीलामी होगी। इसके लिए संपत्ति का मूल्यांकन कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। इधर, कताई मिल के नीलामी की प्रक्रिया अपनाने की तैयारी शुरू होने की खबर से लोगों में मायूसी है।
चालू होती मिल तो 1200 मजदूरों को मिलता काम
संतकबीरनगर। मगहर स्थित संतकबीर सहकारी सूती कताई मिल के बंद हो जाने से लगभग 12 सौ मजदूर व उनके परिवार बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। सात जनवरी 1977 में पूर्व मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी के कार्यकाल में संतकबीर सहकारी सूती कताई मिल की स्थापना की गई थी। कताई मिल का उद्घाटन संजय गांधी ने किया गया था। 1978 से सूती धागे का उत्पादन शुरू हुआ और कम ही दिनों में बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना ली थी। बुनकर बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण बुनकरों को सुलभता से सूत मिल जाया करता था। मिल चालू होने से क्षेत्र के अलावा कस्बे के लोगों के हुनरमंद हाथों को भी काम मिला। मिल मजदूर संगठन के अस्तित्व में आने से वर्ष 1981 में मिल प्रबंधन व मजदूर संगठन के बीच विवाद छिड़ गया। जिसकी वजह से मिल 28 दिन तक बंद हो गई थी। फिर आपसी सहमति के बाद आठ वर्ष तक पुन: मिल का उत्पादन सुचारु रूप से चला, लेकिन 1989 में सूती मिल में आग लगने के कारण इसका काफी नुकसान होने से मिल लगभग दो वर्ष तक बंद पड़ी रही। साल 1992 में पुन: सूती मिल चालू हुई, लेकिन मुनाफे की जगह घाटे के कारण लगातार नहीं चल सकी। वर्ष 1997 में पूर्व जीएम आरपी चौबे के कार्यकाल में मिल पूरी तरह से बंद हो गई। उसके बाद फेडरेशन ने कर्मचारियों को वीआरएस देने की घोषणा कर दी और तत्कालीन एमडी एसडी खन्ना के कार्यकाल में मिल कर्मचारियों को वीआरएस का भुगतान कर दिया गया। मिल पर बकाया अधिक होने के कारण मुंबई हाईकोर्ट के निर्देश पर मिल में ताला लग गया। कर्मचारी, जगन्नाथ, जोखन यादव, शब्बीर अहमद खान, ताज मोहम्मद, जल्लू और कमाल खान ने बताया कि मिल बंद होने के बाद से लगातार दुबारा चालू करने की मांग की जा रही है। 28 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मगहर आए तो उम्मीद जगी कि मिल चालू करने की घोषणा करेंगे, लेकिन आशा निराशा में बदल गई। कताई मिल मजदूर संगठन के अध्यक्ष अशरफ अली ने बताया कि बकाया भुगतान और मिल को दुबारा चालू कराने की लड़ाई जारी रहेगी।