जिले में गरीबों की योजनाओं में घोटालों का सिलसिला नहीं थम रहा है। खमरिया में खाद्यान्न घोटाला, मनरेगा घोटाला, शादी अनुदान घोटाला के बाद अब संपूर्ण स्वच्छता अभियान में छह करोड़ से अधिक घोटाला प्रकाश में आया है।
कागजों पर ही 34 हजार हजार शौचालय का निर्माण कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को तत्कालीन ग्रामप्रधान और सेक्रेटरी से रिकवरी कराने का आदेश दिया है। सभी को आरसी भेजने की कवायद शुरू हो गई।
जिले में वर्ष 2002 से 2011 के दौरान शौचालय निर्माण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आ रही है। पिछले दिनों जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने जिले में बने शौचालयों की सूची विभाग से उपलब्ध कराने के लिए कहा था। कई माह बीतने के बाद भी विभाग सिर्फ 35 हजार शौचालयों की सूची उपलब्ध करा सका है।
जबकि जिले में नौ वर्षों के दौरान 69 हजार शौचालयों का निर्माण कागज पर पूर्ण कराया गया। सूची उपलब्ध न होने पर प्रथमदृष्ट्या लगभग 34 हजार शौचालय कागजों पर निर्मित होने का मामला सामने आ रहा है। 2002 से 2011 के बीच शौचालय निर्माण में करीब सवा छह करोड़ की घपलेबाजी सामने आ रही है।
मामला गंभीर होने पर जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने जिला पंचायत राज अधिकारी को तत्कालीन ग्रामप्रधान और सेक्रेटरी से आधी-आधी रकम रिकवरी कराने का निर्देश दिया। बता दें कि वर्ष 2002 में एक शौचालय पर जहां पांच सौ रुपये मिलते थे वहीं 2003 के बाद डेढ़ हजार रुपये और 2008 के बाद 2200 रुपये प्रति शौचालय के हिसाब से अनुदान मिलने लगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि शौचालय निर्माण में प्रथम दृष्टया गड़बड़ी मानते हुए रिकवरी का आदेश दिया गया है। घपलेबाजी की उच्चस्तरीय जांच के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।