संभल। सोत नदी में जल संरक्षण के लिए चेक डैम बनाने और नदी के किनारे की खाली जमीन पर पौधे लगाए जाएंगे। मनरेगा के तहत चेक डैम बनाए जाएंगे। सरकारी विभाग और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि पौधे लगवाएंगे।
सोत नदी को पुनर्जीवित करने के लिए अमर उजाला की ओर से मई 2019 में मुहिम छेड़ी गई थी। एक महीने में जनता और प्रशासन के सहयोग से छोटी मुहिम एक बड़ा अभियान बन गई। सबसे अधिक योगदान संभल के उप जिलाधिकारी दीपेंद्र यादव ने किया। तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने हौसला बढ़ाया और 16 जून 2019 जिलाधिकारी ने मातीपुर गांव से सोत नदी की खुदाई शुरू कराई। राजस्व विभाग की टीम लगाकर नदी की जमीन से अवैध कब्जे हटाए गए। करीब 50 दिन में नदी की 42 किलोमीटर खुदाई हुई और इसमें भी एक रुपये सरकार का खर्च नहीं हुआ। जन सहयोग की मिसाल बने अभियान में सोत नदी का अधिकतर हिस्सा अवैध कब्जों से मुक्त हुआ और बारिश में पानी भी आया लेकिन न तो नदी के उद्गम स्थल को गंगा से जोड़ा जा सका और न ही जल संरक्षण के लिए कोई काम हो सका।
अलबत्ता तत्कालीन जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने इसके लिए प्रमुख सचिव सिंचाईं को पत्र भी भेजा है। जिलाधिकारी संजीव रंजन ने उप जिलाधिकारी दीपेंद्र यादव से सोत नदी को पुनर्जीवित करने के अभियान की जानकारी ली है। साथ ही उनसे कहा है कि सो तो पुनर्जीवित करने और नदी के जरिये जल संरक्षित करने की मुहिम को आगे बढ़ाएं। वन विभाग के अधिकारियों से कहा गया है कि वे पौधे लगवाने के लिए नदी के किनारों का इस्तेमाल करें। इसी क्रम में उप जिलाधिकारी दीपेंद्र यादव ने गुरुवार को बैठक की। बैठक में सोत नदी पुनर्जीवन समिति के अध्यक्ष वैद्य सत्यप्रकाश रस्तोगी, पर्यावरण के प्रति समर्पित डा. यूसी सक्सेना, सेमुअल सिंह आदि अधिकारी रहे।