जुनावई/चंदौसी। जुनावई विकास क्षेत्र के कादराबाद गांव में सोमवार की सुबह करीब पांच बजे एक पशुशाला में जलाए गए उपलों की चिंगारी से आग भड़क गई। जिसमें सो रही एक 65 साल की महिला की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि एक पशु भी जलकर मर गया। दूसरा गंभीर रूप से झुलस गया। आग बुझाते समय पशुशाला स्वामी दंपती के भी चेहरे व हाथ झुलस गए। मृतक महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के कादराबाद गांव में सोमवार की सुबह लगभग पांच बजे करन सिंह की पशुशाला में अचानक आग लग गई। घना कोहरा होने के कारण लोग देर से ही उठे थे लेकिन दस मिनट पहले ही करन सिंह की पत्नी कलावती देवी खलिहान गई थी। लौटते समय पशुशाला में आग की लपटें देखी तो अपने घर की दौड़ी। पति को जगाया। शोर मचाया तो आसपास के लोग भी दौड़ पड़े। दो पशुओं को तो खोलकर बाहर भगा दिया। लेकिन पूरी झोपड़ी से बनी पशुशाला को आग ने अपने आगोश में ले लिया। पशुशाला के अंदर ही करन सिंह की सास लीलावती (65) पत्नी प्रेम पाल मौर्य निवासी गांव रोनई थाना उघैती जिला बदायूं भी सो रही थी।
ग्रामीणों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया लेकिन आग पशुशाला के मुख्य दरवाजे पर ही लगी थी। इसलिए उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका। लीलावती की उसी पशुशाला में जलकर मौत हो गई। सास को बचाते समय करन सिंह व कलावती भी मामूली रूप से झुलस गए। एक भैंस जलकर मर गई, जबकि दूसरी अस्सी फीसदी झुलस गई। सूचना पर गुन्नौर कोतवाली प्रभारी प्रवीण सोलंकी मौके पर पहुंचे।
मृतक महिला लीलावती के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उप जिलाधिकारी दीपेंद्र यादव ने बताया कि तहसीलदार गुन्नौर सुधीर कुमार के साथ राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजा गया था। उनकी रिपोर्ट में बताया गया कि लीलावती ने कड़ाके की सर्दी में बचाव के लिए पशुशाला में उपले जलाए थे। जिसकी चिंगारी से ही शायद पशुशाला में आग लगी है। जिसमें लीलावती की जलकर मौत हो गई है।
अपने बेटे के साथ अपनी बेटी के ससुराल रहती थी महिला
जुनावई। बदायूं जिले के उघैती के रोनाई खितौरा गांव निवासी लीलावती के पति प्रेम सिंह का निधन काफी पहले ही हो गया था। उसका एक बेटा है जयंती प्रसाद, जिसकी उम्र करीब चालीस साल हो चुकी है लेकिन उसके मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नहीं होने के कारण उसकी शादी नहीं हो सकी है। यही कारण है कि लीलावती अपने बेटे के साथ अपनी बेटी के घर पर कादराबाद में आकर रहने लगी थी। जयंती प्रसाद अपने बहनोई के साथ मजदूरी करता है। घर भी झोपड़ीनुमा बना है, जिसमें शौचालय भी नहीं है। इसलिए पूरा परिवार खलिहान में खुले में शौच जाने को विवश है।