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Sambhal News: तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर से एसडीएम ने सरकारी गूल की जमीन की थी ट्रांसफर

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चंदौसी तहसील के अकबरपुर चितौरी में सरकारी गूल की जमीन को कुछ लोगों के नाम ट्रांसफर और फिर आदेश को निरस्त करने के मामले में एसडीएम फंसते जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि परवानों के अमलदरामद कराने व अन्य कागजों में तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर बनाए गए हैं। इस मामले में जांच टीम की ओर से एडीएम ने तत्कालीन नायब तहसीलदार, कानूनगो को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा हैं।
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गांव अकबरपुर चितौरी में गाटा संख्या 223 में सरकारी गूल की जमीन है। एसडीएम चंदौसी ने कुछ लोगों की मिलीभगत से गूल की जमीन को उनके नाम पर ट्रांसफर कर दिया था। डीएम के निर्देश पर एडीएम के नेतृत्व में गठित टीम जांच कर रही है। एसडीएम ने गूल की जमीन केे ट्रांसफर करने व बाद में उस आदेश को निरस्त कर परवाना अमलदरामद ( प्रविष्टि दर्ज) कराने को पत्र लिखा था। जांच में सामने आया है कि परवाने के अमलदरामद पत्र व कई अन्य पत्रों पर तहसीलदार के किसी ने फर्जी हस्ताक्षर किए हैं। इस मामले में कुछ लोगों के नाम भी सामने आ रहे हैं।
जांच टीम की ओर से फर्जी हस्ताक्षर के स्पष्टीकरण के लिए तत्कालीन नायब तहसीलदार चंदौसी, कानूनगो को नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस में पूछा गया है कि क्या पत्रों में उनके हस्ताक्षर हैं, तत्कालीन नायब तहसीलदार ने नोटिस मिलने की बात स्वीकार की है। इस मामले में एसडीएम सहित अन्य लोग भी जांच के घेरे में आ रहे हैं।
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तहसीलदार के हस्ताक्षर पहचाने नहीं या नजरअंदाज किया
चंदौसी। रोजाना तहसीलदार के हस्ताक्षर के कई पत्र एसडीएम के सामने आते हैं। उन्हें अंदाजा होगा, कि तहसीलदार के हस्ताक्षर किस तरह से होते हैं। पर सरकारी गूल की जमीन के ट्रांसफर व उसके निरस्त के पत्रों पर तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर थे। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में अभी तक तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर को एसडीएम पहचान नहीं अथवा जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया।
गांव अकबरपुर चितौरी में सरकारी गूल की जमीन को ट्रांसफर करने के आदेश को एसडीएम ने नौ जुलाई 2022 को निरस्त किया। परवाना अमलदरामद कराने के लिए तहसीलदार को पत्र लिखा था। इस पत्र पर राजस्व निरीक्षक के हस्ताक्षर हैं। उन्होंने इस पत्र पर 20 सितंबर 2022 को हस्ताक्षर किए हैं। यानी तहसील परिसर में एसडीएम न्यायालय के कक्ष से इस पत्र को राजस्व निरीक्षक के कक्ष तक पहुंचने में 73 दिन लग गए। इस मामले में गड़बड़ी की आशंका है, जो सकता है कि यह आदेश बैक डेट में जारी करा दिया गया है।
एडीएम की ओर से मुझे नोटिस मिला है। नोटिस में हस्ताक्षर के विषय में पूछा गया है। मैं उसका जवाब दे रहा हूं।-निश्चय कुमार, तत्कालीन नायब तहसीलदार चंदौसी।
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सरकारी गूल की जमीन के मामले की किसी भी पत्रावली पर मेरे हस्ताक्षर नहीं हैं।
मोनालिसा जौहरी, तहसीलदार चंदौसी।
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