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पूरे वित्तीय वर्ष इंतजार कराया, 31 मार्च की रात अनुदान आया पर एक भी लाभार्थी को न मिल पाया

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संभल। अल्पसंख्यक दंपतियों को पात्रता के बावजूद वर्ष भर इंतजार कराया गया। वित्तीय वर्ष की आखिरी रात 11.30 बजे तब अनुदान जारी किया गया तब तक ट्रांजेक्शन का समय निकल चुका था। इसीलिए कोषाधिकारी ने वितरण के बिल पास करने से इनकार कर दिया। अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को धनराशि सरेंडर करनी पड़ी।
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गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे अल्पसंख्यक परिवारों के लिए राज्य सरकार शादी अनुदान योजना में प्रति दंपती 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देती है। आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 में 1318 आवेदन आए। खंड विकास अधिकारियों और नगर क्षेत्र में अधिशासी अधिकारियों की जांच में 635 आवेदक पात्र पाए गए थे। इन्हें आर्थिक मदद मिलनी थी।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने इसके लिए धनराशि की मांग की थी क्योंकि लाभार्थी इंतजार कर रहे थे। इंतजार के आखिरी दिन 31 मार्च को रात 11.30 बजे 108 लाभार्थियों के लिए 21.60 लाख रुपये का बजट मिला। अगर यह बजट रात में 9.30 बजे से पहले आ गया होता तो कोषागार से बिल पास हो जाते और अप्रैल के पहले सप्ताह में ही धनराशि लाभार्थियों के खाते में पहुंच जाती पर ऐसा नहीं हो सका क्योंकि धनराशि देरी से आई। इससे वर्ष भर इंतजार कर रहे दंपतियों को निराशा हाथ लगी है।
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अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशालय से 11.30 बजे जैसे ही धनराशि की स्वीकृति मेल पर मिली, मैंने ट्रेजरी से संपर्क किया लेकिन वहां बताया गया कि अब बिल पास नहीं हो सकेगा। इसलिए धनराशि सरेंडर करनी पड़ी।
शैलेंद्र कुमार गौतम, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, संभल
मैंने वर्ष भर इंतजार किया। आवेदन के बाद लगातार विभाग से फोन पर संपर्क बनाए रखा लेकिन निराशा हाथ लगी। ऐसे में आवेदन कराने का मतलब समझ में नहीं आया।
शहनाज, लाभार्थी की मां
योजना में कौन होता है पात्र
अल्पसंख्यक परिवारों को बेटियों की शादी के लिए पैसे की कमी आड़े न आए। इसके लिए शासन द्वारा शादी अनुदान योजना का संचालन किया जा रहा है। योजना में चयनित होने वाले लाभार्थी को 20 हजार रुपये दिए जाते हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस योजना के तहत आवेदक की वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में रुपये 46080 रुपये वार्षिक और शहरी क्षेत्र में 56460 रुपये वार्षिक से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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