जबकि मकान पर काबिज रहे डाक्टर का नाम एफआईआर में नहीं है।
जिला अस्पताल के सरकारी आवास संख्या 3/1 पर डा. जेपीएस यादव काबिज थे। वह यहां पर उसी समय से काबिज हैं जब तैनात थे और उनकी पत्नी डा. अर्चना यादव भी साथ में रहती रही हैं। डाक्टर दंपति का अब मुरादाबाद ट्रांसफर हो गया है। डा. जेपीएस यादव पर इस आवास में अवैध तरीके से रहने का आरोप है। जबकि डा. यादव का कहना है कि वह अवैध तरीके से नहीं रह रहे थे। उनकी पत्नी के नाम यह मकान है। पत्नी का जुलाई 2016 में ट्रांसफर हुआ है।
ट्रांसफर के छह महीने तक सरकारी आवास में रहा जा सकता है फिर अवैध तरीके से काबिज होने का सवाल कहां रहा? इसके बावजूद उप जिलाधिकारी अखिलेश यादव पुलिस बल और तहसीलदार को लेकर शनिवार को शाम यह सरकारी आवास खाली कराने के लिए गए थे। आवास में जेपीएस यादव नहीं मिले तो ताला तोड़कर आवास से उनके सामान को निकाला गया। इसी सामान में एक रायफल निकली थी। रायफल को पुलिस के सुपुर्द किया गया है। जबकि सामान को लिस्टिंग के बाद सीएमओ की सुपुर्दगी में दे दिया गया है। आवास खाली कराने के बाद एसडीएम अखिलेश यादव ने कोतवाली संभल में सरकारी आवास संख्या 3/1 के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। लेकिन चिकित्सक डा. जेपीएस यादव का नाम पूरी तहरीर में कहीं नहीं है।
संभल। एफआईआर में मकान को मुल्जिम बनाए जाने का खेल कहीं सभी को बचाने के लिए तो नहीं रचा गया। साफ है कि ऐसा मामला कोर्ट में पहली ही तारीख में सवालों के घेरे में आ जाएगा। यदि आवास सरकारी था तो विभाग को प्रतिवादी बनाया जाना था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एसडीएम, तहसीलदार की मौजूदगी में सामान निकाला गया था। सभी को पता था कि चिकित्सक डा. जेपीएस यादव वहां रह रहे हैं, क्योंकि तीन दिन पहले ही एसडीएम ने उन्हें नोटिस भिजवाया था। उसके बावजूद उन्हें पार्टी नहीं बनाया गया।
संभल। उप जिलाधिकारी अखिलेश यादव ने बताया कि जेपीएस यादव ही नहीं कई और डाक्टर भी सरकारी आवासों में अवैध तरीके से रहते हैं उन्हें भी बेदखल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिन डाक्टरों और चिकित्साकर्मियों के नाम आवास आवंटित नहीं हैं और वे सरकारी आवास में रह रहे हैं उन सभी को बेदखल किया जाएगा। इस बारे में जिलाधिकारी को भी अवगत कराया गया है। आदेश आते ही प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
एफआईआर दर्ज हो गई है। जो व्यक्ति उस आवास में रहता था उसका नाम विवेचना के दौरान खुल जाएगा। इस मामले में पुलिस साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई करेगी। कोई तथ्य छुपाया नहीं जाएगा।
बालेंदु भूषण सिंह, पुलिस अधीक्षक।