करेंसी बंद होने के 12 दिन में दो-तीन करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। लेबर को देने के लिए बैंकों से भुगतान नहीं निकल पा रहे हैं। सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है।
कारोबारी अपनी लेबर से उधार पर काम करा रहे हैं या फिर थोड़ा-थोड़ा भुगतान कर रहे हैं। उत्पादन की रफ्तार धीमी हो गई है। निर्यात के आर्डर समय पर कैसे पूरे हों यह सवाल कारोबारियों के सामने है? सरायतरीन की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री 300 करोड़ रुपये वार्षिक का अनुमानित कारोबार करती है। नोट बंदी के बाद समस्या है। बैंकों से कैश नहीं मिल पा रहा है। कारोबारी उलझन में हैं। क्रिसमस के आर्डर पूरे होना मुश्किल हो गया है। नोट बंदी से पहले इन्हीं आर्डर को पूरा करने की तैयारी में निर्यातक लगे हुए थे, लेकिन अचानक 8 नवंबर को नोट बंद कर दिए गए।
अब इसका असर आने लगा है। निर्यातकों का कहना है कि एक बार लेबर तो उधार पर काम कर सकती है लेकिन मुश्किल हड्डी और सींग न मिलने से हो रही है, कच्चा माल कैश पर ही मिलता है। कैश का फ्लो कम होने की वजह से सबसे अधिक मुसीबत है। यदि यही हाल रहा तो इंडस्ट्री को भारी नुकसान उठाना पड़ा। हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर सुहेल परवेज ने बताया कि अब नए आर्डर लेने में भी डर लगता है। करेंसी का संकट लंबा खिंचा तो कारोबार को और ज्यादा झटका लगेगा। अभी हाल में ही आस्ट्रेलिया से एक आर्डर मिला है। बायर्स ने 45 दिन का समय दिया लेकिन संकट को देखते हुए बायर्स से हमने 75 दिन का समय मांगा है।