प्रदेश में सामूहिक विवाह आयोजनों के जरिए भाईचारे की नई इबारत लिखने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शादी अनुदान योजना का पूरा प्रारूप बदल दिया। अब व्यक्तिगत स्तर सरकारी मदद से आयोजन न होंगे बल्कि एक ही तिथि में सभी वर्गों के गरीब और पात्र व्यक्तियों की बेटियों का विवाह कराया जाएगा।
एक ओर जहां निकाह कुबूल..कुबूल होगा तो वहीं दूसरी ओर सात फेरे होंगे। एक तरफ मंडप सजेंगे तो दूसरी ओर दावत के दस्तरख्वान और निकाहनामे के पंडाल। यदि ऐसा होता है तो एक भाईचारे का माहौल बनेगा। दोनों संप्रदायों के लोग एक दूसरे की समृद्ध परंपराओं को समझ सकेंगे और देख भी सकेंगे। सामूहिक विवाह और निकाह संबंधी आयोजन समाज कल्याण विभाग के माध्यम से होंगे।
इसके लिए तैयारी चल रही है। आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन में पात्रता पहले जैसी है लेकिन आर्थिक मदद बढ़ गई है। एक जोड़े की शादी पर सरकार 35,000 रुपये व्यय करेगी। इसमें 20,000 रुपये कन्या के खाते में जाएंगे जबकि 10,000 रुपये में उसके वैवाहिक जीवन के लिए जरूरी सामान दिया जाएगा। पांच हजार रुपये उसकी शादी में आने वालों के खानपान पर व्यय होंगे।
सामूहिक विवाह आयोजन जिला स्तर पर किया जाएगा। इसमें एक ही तिथि में विवाह और निकाह होंगे। यह हो सकता है कि एक ही कैंपस में एक तरफ सात फेरे लिए जा रहे हों और दूसरी तरफ निकाह की रस्में पूरी कराई जा रहीं हों। इस संबंध में जिला स्तर पर अधिकारी मंथन कर रहे हैं। शासन की ओर से एक जनपद में एक दिन में 100 युवक-युवतियों का विवाह सरकारी खर्चे पर एक ही स्थान पर कराने के निर्देश जिला समाज कल्याण अधिकारी को मिल गए हैं।