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यूरिया खाद की किल्लत से किसान परेशान, निजी दुकानों पर यूरिया खाद के साथ थोपी जा रही जिंक

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संभल/मढ़न। यूरिया खाद की किल्लत से जूझ रहे किसानों को अब नई समस्या से जूझना पड़ रहा है। निजी खाद भंडार किसानों को यूरिया खाद के साथ जिंक थोप रहे हैं। यूरिया खाद की एक बोरी लेने के लिए किसानों को पांच सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसमें 280-300 रुपये की यूरिया खाद की बोरी दी जा रही है उसके साथ पांच किलोग्राम जिंक देकर रुपये अलग से लिए जा रहे हैं। जिंक लेने से इनकार करने पर यूरिया खाद की बोरी भी नहीं दी जा रही। मजबूरन किसानों को जिंक भी खरीदना पड़ रहा है। जिम्मेदार किसानों के साथ हो रहे शोषण की अनदेखी कर रहे हैं।
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असमोली विकासखंड क्षेत्र के गांव टांडा कोठी, चौधरपुर, सैंधरी और मढ़न के निजी खाद भंडारों पर किसानों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। यूरिया खाद की किल्लत जिलेभर में बनी हुई है। सहकारिता समितियों पर खाद की आपूर्ति पूरी नहीं पड़ रही। मजबूरन किसानों को निजी खाद भंडारों से ही यूरिया खाद की बोरी लेनी पड़ रही है। निजी खाद भंडार स्वामी किसानों की मजबूरी से आर्थिक लाभ कर रहे हैं।
यूरिया खाद की बोरी 280 से 300 रुपये तक की बेची जा रही है। इस बोरी के साथ 40 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से पांच किलोग्राम जिंक थोपा जा रहा है। किसान जिंक नहीं खरीदेगा तो यूरिया खाद नहीं दिया जाएग। जबकि इस समय जिंक का कोई उपयोग नहीं किया जा सकता। अगली धान की फसल आने तक वह खराब हो जाएगा। अब सवाल उठता है कि किसानों के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है। जिम्मेदार अनजान क्यों हैं।
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