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समय से नहीं मिला यूरिया खाद तो धान की फसल की पैदावार कम होने की उम्मीद

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संभल। जिले में खाद की आपूर्ति को लेकर किल्लत चल रही है। इसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है। इस दौरान कालाबाजारी की जा रही है। 267.50 रुपये की कीमत के खाद के कट्टे को 300 या उससे अधिक कीमत में बेचे जाने की लगातार शिकायतें की जा रही है। इसका मुद्दा किसान संगठन भाकियू (अअ) ने उठाया है। जिस पर प्रशासनिक अधि कारियों ने रैंडम चेकिंग किए जाने की बात कही लेकिन अब तक यह चेकिंग नहीं हुई।
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किसान लगातार खाद आपूर्ति की किल्लत से जूझ रहा है। फिलहाल किसी भी सोसाइटी में खाद उपलब्ध नहीं है। पवांसा गांव में स्थित सहकारिता समिति पर गुरुवार की दोपहर 1.26 बजे कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। ऐसे में किसान यूरिया खाद लेने आए लेकिन निराश होकर अपने घर लौट गए। किसानों का कहना है कि सोसायटी कर्मचारी खाद नहीं होने की बात कह रहे हैं और कब खाद आएगा इसकी जानकारी भी नहीं दे रहे।
किसानों का कहना है कि धान की फसल को यूरिया का खाद लगना बहुत ही जरूरी है अन्यथा फसल पैदावार कम होगी। गांव चिरौली भगवंतपुर स्थित पीसीएफ पर भी पिछले 10 दिन से यूरिया खाद का कोई अता-पता नहीं है।
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किसान आते हैं और निराश होकर लौट जाते हैं। ऐसे में किसानों कि यूरिया खाद को लेकर काफी बड़ी समस्या खड़ी हो गई। जिसका समाधान होता नहीं दिख रहा। पीसीएफ सेंटर इंचार्ज नरेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले 10 दिन से यूरिया का खाद नहीं है किसान आते हैं और वापस चले जाते हैं। लगातार अधिकारियों से बात की जा रही है मगर यूरिया खाद कब आएगा इसका अभी कोई सक्षम अधिकारी से आश्वासन नहीं मिला है।
पवासा ब्लॉक क्षेत्र में यूरिया खाद क्षमता से अधिक वितरण हो चुका है इसके बाद भी किसानों को खाद की आवश्यकता पड़ रही है। जिला स्तरीय अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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अनिल कुमार त्रिपाठी, सहायक विकास अधिकारी कोऑपरेटिव।
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