संभल। निजी प्रकाशकों की किताबें बेचने और छात्रों को विशेष दुकानों से किताबें खरीदने के लिए मजबूर करने वाले 33 विद्यालयों में से 24 ने जुर्माना राशि जमा कर दी है। नौ विद्यालयों ने दो महीने गुजर जाने के बाद भी यह जुर्माना राशि जमा नहीं की जबकि एक सप्ताह का समय दिया गया था। इसी तरह अमान्य 44 विद्यालयों में से किसी ने भी जुर्माना राशि जमा नहीं की है। अब इन अमान्य विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डीआईओएस श्यामा कुमार ने कमेटी गठित की है। यह कमेटी रिपोर्ट बनाकर अधिकारियों को भेजा करेगी। 16 अप्रैल को डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने 34 अधिकारियों की टीम बनाकर विद्यालयों की जांच कराई थी। इस दौरान 44 अमान्य विद्यालय मिले थे। सभी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम के उल्लंघन के तहत की गई थी। सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध विद्यालयों में निजी प्रकाशकों की किताबें मिली थीं। यह विद्यालय छात्रों को केवल विशेष विक्रेताओं से ही किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे थे। एनसीईआरटी की किताबें कहीं नहीं मिली थीं। इसके चलते ही जुर्माना लगाने की कार्रवाई की गई थी।
गैरमान्यता प्राप्त विद्यालयों में से 24 ने 24 लाख रुपये जमा कर दिए हैं। नौ विद्यालयों ने जुर्माना राशि जमा नहीं की है। डीआईओएस श्यामा कुमार ने बताया कि जुर्माना जमा नहीं करने वाले विद्यालय संचालकों के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
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कमेटी गठित की गई, हर महीने अधिकारियों तक जाएगी रिपोर्ट
डीआईओएस श्यामा कुमार ने बताया कि अवैध व अमान्य विद्यालयों के लिए उनकी अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। इसमें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व खंड शिक्षा अधिकारी सदस्य रहेंगे। कमेटी हर महीने जांच कर ऐसे विद्यालयों की रिपोर्ट मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक एवं सहायक मंडलीय शिक्षा निदेशक (बेसिक) को भेजी जाएगी।
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