संभल। शहर में प्रशासन ने दो महाकूपों की खोज की है। जिलाधिकारी डाॅ. राजेंद्र पैंसिया ने कहा कि 92 तीर्थ हैं। जिसमें 87 देव तीर्थ हैं और पांच महातीर्थ हैं। 87 देवतीर्थों में से 68 जल तीर्थ या तीर्थ कहे जाते हैं और शेष 19 महाकूप कहे जाते हैं। वर्तमान में 14 तीर्थ स्थल नहीं मिले थे। इनमें से आठ तीर्थ स्थलों की पहचान कर ली है। उनमें से वायु महाकूप है। यह महाकूप 16वीं या 17वीं सदी के आसपास का प्रतीत होता है। प्रत्येक कूप का महत्व है। दूसरा यमदाग्नि महाकूप मिला है। इस तीर्थ स्थान को और अच्छा, सुन्दर बनाया जाएगा ताकि संभल नगरी तीर्थ नगरी के रूप में विकसित हो। जिलाधिकारी डाॅ. राजेंद्र पैंसिया ने कहा कि तीर्थों के मुख्य द्वार बनाए जा रहे हैं। लोग अच्छे से पूजा कर सकें। वायु महाकूप के अंदर कचरा भरा हुआ है। कचरे को खाली करवा रहे हैं और ऊपर जाली लगवाई जा रही है। लोगों की साधना, उपासना और उपासना का केंद्र बने, यही प्रयास है। उन्होंने कहा कि तीर्थों को विकसित करने के लिए डीपीआर बनवा रहे हैं, जो शासन से स्वीकृत होकर आएगी। सभी तीर्थों का निर्माण कराएंगे। जिसकी धनराशि आ चुकी है, उसका कार्य इसी वर्ष शुरू हो जाएगा। शेष की डीपीआर शासन को भिजवाएंगे। जैसे ही वहां से स्वीकृति मिलेगी तो धन आ जाएगा। परिक्रमा मार्ग पर लगभग 250 करोड़ का बजट खर्च होगा। इस दौरान एसडीएम विकास चंद्र, ईओ नगर पालिका डा. मणिभूषण तिवारी मौजूद रहे।
00000000
जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कराया जा रहा
पौराणिक एवं धार्मिक नगरी संभल में पांच धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के लिए कवायद चल रही है। शासन से सात करोड़ रुपये का बजट जारी होने के बाद प्रशासन डीपीआर बनवा रहा है। इनमें श्री कल्कि विष्णु मंदिर, अशोक कूप, कांति तीर्थ, चतुर्मुख कूप और धर्म कूप शामिल हैं। वहीं यम तीर्थ पर भी विकास कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। इसको नगर पालिका ने वंदन योजना व 15वें वित्त आयोग की राशि से संवारा है।
00000000
भगवान कल्कि का अवतरण संभल में होगा
धार्मिक मान्यता और पुराणों के उल्लेख से माना जाता है कि कलियुग में भगवान कल्कि का अवतरण संभल में होगा। इसके प्रमाण भी उल्लेखित किए गए हैं। इसी मान्यता के तहत सभी तीर्थ और कूप को जोड़ा जाता है।