बिलारी से मौजूदा विधायक का टिकट काटकर पूर्व सांसद शफीकुर्रहमान बर्क के पोते जियाउर्रहमान बर्क को टिकट दिया गया है। माना जा रहा है कि तुर्क विरोध को शांत करे के लिए ऐसा कदम उठाया गया है।
महीनाभर पहले मैनाठेर कोतवाली के एक पेट्रोल पंप पर हिस्ट्रीशीटर शौकत पाशा की हत्या के बाद सामने आए तुर्क विरादरी के प्रबल विरोध के बीच लंबे समय से अपनी परंपरागत सियासत में खामोश दिख रहे पूर्व सांसद डा. शफीकुर्रहमान बर्क को एक बार फिर मजबूती के साथ सामने ला दिया। सपा को भी लगने लगा कि यदि डा. बर्क को नहीं साधा गया तो वह दूसरी पार्टी में न चले जाएं, यदि ऐसा हुआ तो तुर्क विरादरी का विरोध संभल, मुरादाबाद व अमरोहा जिलों की सीटों पर नुकसान पहुंचा सकता था।
संभल से कैबिनेट मंत्री इकबाल महमूद को भी पार्टी नाराज नहीं कर सकती थी, इसलिए शायद सपा मुखिया ने कैबिनेट मंत्री आजम खां के करीबी माने जाने वाले विधायक मोहम्मद फईम का टिकट काटकर डा. शफीकुर्रहमान बर्क के पोते जियाउर्रहमान बर्क को दे दिया। हालांकि मोहम्मद फहीम भी तुर्क विरादरी से ही है।
बिलारी क्षेत्र के सियासी दिग्गज मोहम्मद फहीम का टिकट कटने की वजह चाचा-भतीजे की तकरार से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि हाल ही में जो भी विधायक मुख्यमंत्री की बैठक में शामिल हुए, उनमें से कई का पत्ता साफ कर दिया गया है। सपा जिलाध्यक्ष फिरोज खां की बिलारी व संभल सीट पर दावेदारी को भी खारिज कर दिया गया है।