चंदौसी। बीते करीब पांच वर्षों से बंद पड़ी आगरा कैंट पैसेंजर ट्रेन का संचालन दोबारा से शुरू नहीं हो सका। इस ट्रेन को कोरोना काल के समय रेलवे ने बंद कर दिया था। ऐसे में नगर व आसपास के क्षेत्र के लोगों को आगरा व फिरोजाबाद जंक्शन तक जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन दोनों रेलवे स्टेशन के लिए चंदौसी से पहले एकमात्र ट्रेन आगरा कैंट ही थी। इस संबंध में कई बार सामाजिक संगठन व स्थानीय लोग रेलवे अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर इस ट्रेन के संचालन की मांग भी कर चुके हैं।
चंदौसी रेलवे स्टेशन से आगरा- फिरोजाबाद जंक्शन तक जाने के लिए पहले एकमात्र ट्रेन आगरा कैंट ही थी। बरेली और ऋषिकेश जंक्शन से आई अलग-अलग ट्रेनों को चंदौसी रेलवे स्टेशन पर जोड़ दिया जाता था जो आगरा कैंट के नाम से जानी जाती थी। यहां से यह ट्रेनें टूंडला जंक्शन तक जाती थीं। जहां इस ट्रेन को दो भागों में कर दिया जाता था। इसका एक भाग आगरा और दूसरा भाग फिरोजाबाद के लिए जाता था। फिर फिरोजाबाद और आगरा से अलग-अलग ट्रेनें चलकर टूंडला स्टेशन पर मिलती थीं और यहां इन दोनों ट्रेनों को मिलाकर आगरा कैंट के नाम से पैसेंजर ट्रेन बनाकर चंदौसी रेलवे स्टेशन के लिए रवाना किया जाता था। चंदौसी रेलवे स्टेशन पर दोनों ट्रेनों को अलग- अलग कर दिया जाता था। यहां से एक ट्रेन बरेली और दूसरी का संचालन ऋषिकेश के लिए किया जाता था।
नगर व आसपास के लोगों को आगरा व फिरोजाबाद जाने के लिए एकमात्र यहीं ट्रेन थी। लेकिन इस ट्रेन का संचालन कोरोना काल के समय बंद कर दिया गया। मौजूदा समय में आगरा व फिरोजबाद के लिए कोई सीधे ट्रेन न होने यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में यात्री ज्यादा रुपये खर्च कर रोडवेज बस या फिर अपने निजी वाहन से इन दोनों शहरों तक के लिए सफर करते हैं।
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मेरा जूता का कारोबार है। अधिकांश खरीदारी आगरा से ही होती है। पहले आगरा कैंट से आगरा के जिला आना जाना होता था लेकिन इस ट्रेन के बंद होने बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब या तो रोडवेज या फिर निजी वाहन से आगरा जाना पड़ता है। इससे अतिरिक्त रुपये खर्च हो रहे हैं। जिससे व्यापार पर भी असर पड़ रहा है।
महताब शमशी, जूता व्यापारी
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मेरा चूड़ी का व्यापार है। चूड़ियों के लिए फिरोजाबाद आना जाना लगा रहता है। चंदौसी से आगरा तक के लिए ट्रेन न होने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। आगरा जाने वाली रोडवेज बसें भी शहर के अंदर से न जाकर बाईपास से होकर गुजर रही हैं।
मोबीन अंसारी, चूड़ी व्यापारी
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मेरा साबुन सर्फ का व्यापार है। व्यापार के सिलसिले में आगरा व अलीगढ़ आना जाना लगा रहता है। पहले आगरा कैंट से आगरा तक का सफर कम रुपये में आसानी से हो जाता था। लेकिन अब रोडवेज बस या निजी वाहन करके सफर करना पड़ रहा है।
मोहम्मद राशिद, साबुन व्यापारी