नव सृजित जनपद संभल के जिला मुख्यालय पर अंतिम फैसला मंगलवार की शाम सात बजे से मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में प्रस्तावित बैठक में लिया जा सकता है। इसके क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की परीक्षा होगी, कौन अपने क्षेत्र की कितनी वकालत करेगा। इसके लिए जिलेभर के सभी पार्टियों के जनप्रतिनिधियों को बुलाया गया है। जिलाधिकारी आनंद कुमार सिंह संबंधित अभिलेख लेकर आज ही लखनऊ रवाना हो गए हैं।
29 सितंबर-2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने संभल में एक जनसभा के दौरान नए जिले का ऐलान किया था, जिसे भीमनगर नाम दिया गया था। लेकिन उसके मुख्यालय को लेकर चंदौसी और संभल के बीच विवाद छिड़ गया, जो अभी तक नहीं थमा है। महीनों तक आंदोलन हुए, शहर बंद रहे।
आखिरकार अस्थायी मुख्यालय को केंद्रबिंदु मानकर बहजोई में स्थापित कर दिया गया। इसके बाद सत्ता बदली तो समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने भीमनगर का नाम बदलकर संभल कर दिया। इसके बाद पंवासा में मुख्यालय बनाने के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई। लेकिन मुख्यालय निर्माण के नाम पर कहीं भी एक ईंट आज तक नहीं लगी।
एक करोड़ रुपये जारी किए जाने की बात कही गई लेकिन यह धनराशि जिले में नहीं पहुंची। मुख्यालय विवाद अभी भी लगातार जारी है। लेकिन अब भाजपा की प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर संभवत: अंतिम मुहर लगाने का मन बना लिया है। मुख्यालय को लेकर 13 मार्च-2018 की शाम सात बजे लाल वहादुर शास्त्री भवन में बैठक होगी।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में प्रस्तावित होने वाली इस बैठक में जिलाधिकारी आनंद कुमार सिंह व अन्य अफसरों के साथ साथ जिलेभर के जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। इसमें राज्यमंत्री गुलाब देवी, गुन्नौर के विधायक अजित कुमार राजू, असमोली की विधायक पिंकी यादव, संभल के विधायक इकबाल महमूद भी सहभागिता करेंगे। संभावना जताई जा रही हैकि मुख्यालय को लेकर इस बैठक में कोई महत्वपूर्ण फैसला किया जा सकता है।