चंदौसी। ओमप्रकाश शर्मा के हाथ में सजी 15 किलो की राखी सांप्रदायिक सौहार्र्द का संदेश दे रही है। पिछले 39 वर्षों से शहर व दूरदराज से बहनों द्वारा भेजी गई राखियों की संख्या 4011 हो चुकी है। अब भाई बहन के प्रेम की प्रतीक राखी की चौड़ाई 64 इंच हो चुकी है।
अहमदाबाद से शौकत सलमानी की सगी बहनें चंदौसी के साहूकारा मोहल्ला निवासी ओमप्रकाश शर्मा को राखियां भेजती हैं तो सरोज शर्मा हल्द्वानी से, रेखा शर्मा, बेबी अग्रवाल, दीना चंदौसी से, नेहा शर्मा, चंचल शर्मा, यशी शर्मा, फरीदाबाद से रेनू, शाहना, अमीर जहां, कानपुर से वंदना, साधना, बदायूं से सारिका, नवाब गंज से प्रीति, रितू, भोपाल से संगीता, बबली, बरेली से बेबी, कोलकाता से नाज, मुरादाबाद से आशा, किच्छा से अनीता, नजीबाबाद से कम्मो, अनीता, उर्मिला, अमरोहा से नाजिया परवीन, मुंबई से साधना, दिल्ली से यशी, सुदेश शर्मा, समेत ओमप्रकाश की देशभर में कई मुंहबोली बहनें हैं जो हर साल रक्षाबंधन पर उन्हें राखियां भेजती हैं। आमतौर पर भाई राखी बंधवाते हैं, जो दो चार दिनों के बाद खो जाती है।
कलाइयों से उतर जाती है लेकिन ओमप्रकाश शर्मा अपनी बहनों द्वारा भेजी जाने वाली राखियों को सहेज कर रखते हैं। इन राखियों को एक राखी में पिरोते हैं। वह 1980 से ऐसा कर रहे हैं। जिससे राखियों की संख्या 4011 व भार 15 किलो हो चुका है।
ओमप्रकाश शर्मा ने भाइयों का आह्वान किया कि कलाई पर बांधी गई बहन का प्रेम होता है, इसे यूं ही उतार कर फेंकना उचित नहीं होता है। राखी उतारना है तो उनका सम्मान करते हुए किसी पवित्र जल में प्रवाहित करना चाहिए। उन्होंने तो 1980 से बांधी गई सभी राखियां सहेज कर रखी हैं।