संभल। बेसिक शिक्षा विभाग की अनदेखी के चलते जिले में अवैध तरीके से संचालित 44 निजी प्राइमरी स्कूलों ने तीन माह बाद भी जुर्माना नहीं जमा किया है। लापरवाही की हद तो ये है कि अभी तक विभाग खाता ही नहीं खुलवा सका है, जिसमें जुर्माने की राशि जमा की जानी है। बीएसए अलका शर्मा का कहना है कि प्रक्रिया को पूरा करने में समय लगा है। एक या दो दिन में खाता खुल जाएगा, जिसमें जुर्माना राशि संचालकों को जमा करनी है।
16 अप्रैल को डीएम के आदेश पर 34 टीमों ने जिलेभर में स्कूलों के निरीक्षण किए थे। इसमें 44 निजी प्राइमरी स्कूल ऐसे मिले जो अवैध थे। इसके अलावा गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या 33 रही थी। इन स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें बेचने और छात्रों को चुनिंदा दुकानों से किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा था। एनसीईआरटी की किताबों का कहीं इस्तेमाल नहीं मिला। इसके चलते उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम के उल्लंघन के तहत कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई की जद में सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध स्कूल भी शामिल हैं।
गैर मान्यता प्राप्त 33 स्कूल में से 24 ने जुर्माना राशि जमा कर दी है। जबकि निजी प्राइमरी स्कूलों में किसी ने जुर्माना राशि जमा नहीं की है। इसका कारण हैं कि विभाग अभी वह खाता नहीं खुलवा सका है। जिसमें यह जुर्माना राशि जमा की जानी है।
अवैध व अमान्य स्कूलों की निगरानी के लिए कमेटी बन चुकी है
अवैध व अमान्य विद्यालयों के लिए डीआईओएस की अध्यक्षता में कमेटी गठित हो चुकी है। इसमें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व खंड शिक्षा अधिकारी सदस्य रहेंगे। कमेटी हर महीने जांच कर ऐसे विद्यालयों की रिपोर्ट मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक एवं सहायक मंडलीय शिक्षा निदेशक (बेसिक) को भेजेगी।
कोट
जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया को पूरा करने में समय लगा है। इसके चलते खाता नहीं खुल सका था। अब प्रक्रिया पूरी हो गई है। एक या दो दिन में खाता खुल जाएगा। उसके बाद जुर्माना राशि जमा कराई जाएगी। -अलका शर्मा, बीएसए, संभल।