संभल। तापमान में अचानक हुई वृद्घि के चलते गेहूं के उत्पादन पर भी खतरा मंडराने लगा है। इसके अलावा सरसों व मसूर की फसलों पर भी बदलते मौसम के चलते प्रतिकूल असर पड़ने लगा है। ऐसे में फसलों का उत्पादन 20 से 30 प्रतिशत घट सकता है। फसलों में नमी बनाए रखने के लिए किसानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। जिले में 1.3866 लाख हेक्टेयर में गेहूं, 14703 हेक्टेयर में राई व सरसों, 8647 हेक्टेयर में तोरिया और 1378 हेक्टेयर में मसूर की फसल की बोआई हुई है। कृषि वैज्ञानिक डाॅ. महावीर सिंह के मुताबिक गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए इस समय तापमान 16 से 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास होना चाहिए। लेकिन इन दिनों तापमान 15 से 30 डिग्री तक दर्ज किया जा रहा है। जिले में जनवरी महीने तक तो तापमान ठीक रहा, लेकिन फरवरी की शुरूआत से ही तापमान में अचानक बढ़ोतरी होने लगी। इसके चलते कृषि वैज्ञानिकों से लेकर किसानों तक की पेशानी बढ़ गई है।
20 फरवरी को तो दिन का तापमान 31.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुुंच गया। बढ़े तापमान के चलते गेहूं की फसल पर विपरीत असर पड़ने की आशंका है। किसानों का मानना है कि यदि इसी प्रकार तापमान में वृद्धि हुई तो गेहूं के उत्पादन में कमी आएगी। खासतौर पर गेहूं की पछेती फसल में काफी नुकसान हो सकता है।