संभल। जिले में 327 ग्राम पंचायतों के लिए इस वित्त वर्ष में 31 करोड़ रुपये खर्च करने के लिए आए हैं। शासन की मंशा है कि ग्राम पंचायतों में सुधार किया जाए और उन्हें मॉडल के रूप में विकसित किया जाए। इसलिए ही ओडीएफ प्लस मॉडल ग्राम पंचायत का नाम दिया गया है। जिला स्तर पर यह महत्वपूर्ण योजना सुस्त ही नहीं चल रही बल्कि अधिकारियों की लापरवाही भी भेंट चढ़ी हुई है। 327 ग्राम पंचायतों में से 50 ग्राम पंचायत ऐसी हैं जहां कोई काम शुरू नहीं किया गया है। जबकि ग्राम पंचायत निधि में लाखों रुपये हैं। जबकि इस वित्तीय वर्ष के पूरा होने में चार महीने से भी कम समय बचा है। यही स्थिति पिछले वित्त वर्ष में रही थी। 46 ग्राम पंचायतों का चयन ओडीएफ प्लस मॉडल ग्राम पंचायतों के लिए हुआ था। 19.7 करोड़ रुपये जारी हुए थे लेकिन 11.9 करोड़ ही खर्च हो सके थे। 7.9 करोड़ रुपये वित्तीय वर्ष 2023-24 में शामिल
ब्लॉक असमोली- ग्राम पंचायत बिलालपत, चंदवार, इकरोटिया, इटायला माफी, हरसिंहपुर, मवईडोल, नहरौली।
ब्लॉक बहजोई- ग्राम पंचायत बहरोली ताहरपुर, बमनपुरी कला, बिसारू, चंदनकटी मौजा, धर्मपुर, दिलगौरा, केशोपुर, लहरावन, पाठकपुर, राजपुर।
ब्लॉक बनियाखेड़ा- ग्राम पंचायत आटा, बेरनी, बिचैटा काजी, जहांगीरपुर, मोहम्मद गंज, पैगारफातपुर, रतनपुर।
ब्लॉक गुन्नौर- ग्राम पंचायत भकरौली, धनारी पट्टी लाल सिंह, कैल, कुहैरा, मुढैना।
ब्लॉक जुनावई- ग्राम पंचायत लावर।
ब्लॉक पंवासा- गंगनेटा, कासमपुर, खानपुर सराय उर्फ आलमपुर, ओरंगपुर सिलैटा।
ब्लॉक रजपुरा- चंदूनगला, दीपपुर डांडा, हैमदपुर, हरदासपुर, इकौना, मंडावली, मुकटपुर, न्यौरा, रजावली, रोरादीप, सैंडोरा, सैतुआ, सिंघोली कल्लू।
ब्लॉक संभल- खानपुर बंद, मंडलाई।
जहां चल रहा काम वहां सुस्त है मॉडल ग्राम पंचायत बनाने की चाल
जिले की 277 ग्राम पंचायतों में ओडीएफ प्लस मॉडल ग्राम पंचायत बनाने का काम तो शुरू हो गया लेकिन चाल सुस्त है। इन ग्राम पंचायतों में 50 से ज्यादा ऐसी ग्राम पंचायत हैं जहां 10 से 15 प्रतिशत ही काम हुआ है। यदि पूरे आंकड़े पर नजर डाली जाए तो जिलेभर में 40 प्रतिशत ही काम हो सका है।
ग्रामीणों को राहत दिए जाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य कराए जाने हैं। इसमें आरआरसी सेंटर (कूड़ा प्रबंधन कक्ष) का निर्माण, नाली, पानी के रिसाइकिलिंग के लिए तालाब का निर्माण, सोखता गड्डा, खाद निर्माण के लिए गड्डे, सिल्ट चेंबर आदि काम कराए जाने हैं। यह सभी काम ग्रामीणों की सहूलियत के लिए हैं।