संभल। सावधानी के तौर पर मिली सलाह मान ली जाए तो होनी टल भी सकती है। ऐसा कहा जाता है। गंगा एक्सप्रेसवे पर बुधवार की सुबह बच्चों की चीखपुकार से ऐसी मची की आसपास जिसने सुनी वह सहम गया। कार डिवाइडर से इस रफ्तार से जाकर टकराई कि इंजन फट गया और डिवाइडर के बीच में कार फंस गई। चालक अबूवकर जो परिवार के सदस्य थे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। जबकि उनके भाई की पत्नी हिना और भांजी जुनैरा ने मुरादाबाद के अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। आठ लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। इन घायलों का फिलहाल उपचार चल रहा है और लखनऊ से नाते रिश्तेदार देरशाम तक संभल पहुंच गए।
अबुवकर के रिश्तेदार अकरम ने बताया कि हम दो कार से परिवार के लोग कश्मीर गए थे। मंगलवार की रात लौटने का प्लान बना तो पठानकोट में ठहरने की बात तय हुई थी। रात के समय ही पठानकोट पहुंचे तो अबुवकर ने पठानकोट में ठहरने से मना कर दिया और लखनऊ ही पहुंचकर आराम करने की बात कही। करीब 600 किलोमीटर दूर तक तो अबुवकर कार दौड़ा लाए लेकिन हल्की से झपकी आई और हादसा हो गया। अकरम ने बताया कि यदि पठानकोट में आराम करते तो बुधवार की दोपहर तक वहां से चलते और बुधवार की शाम तक लखनऊ पहुंचने का इरादा सभी ने बनाया था।
अबुवकर की कार पीछे चल रही थी और उनके रिश्तेदार आरिफ की कार 20 किलोमीटर से ज्यादा फासले पर आगे चल रही थी। आरिफ ने बताया कि जब वह खिरनी टोल पर पहुंचे तो उन्हें कर्मचारियों ने बताया कि पीछे एक स्कॉर्पियो कार डिवाइडर से टकरा गई है। इस जानकारी पर लौटकर गए। मौके पर मंजर देखकर होश खराब हो गए। बताया कि पुलिस और गंगा एक्सप्रेस-वे की एंबुलेंस पहुंच गई थी। अबुवकर ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। बाकी लोग दर्द से तड़प रहे थे।
हादसे का शिकार हुई स्कॉर्पियो कार के पीछे तौकीर की कार चल रही थी। तौकीर का कहना है कि उनकी कार से करीब 400 या 500 मीटर की दूरी का फासला था। रफ्तार करीब 110 से 120 होगी। अचानक से स्कॉर्पियो कार का संतुलन बिगड़ा और डिवाइडर से टकरा गई। बताया कि हादसा इतना भीषण था कि कार डिवाइडर से टकराकर घुस गई। अचानक से ब्रेक लेकर निकले तो सभी लोग बुरी तरह फंसे हुए थे। गंगा एक्सप्रेसवे की एंबुलेंस और पुलिस को सूचना दी। तत्काल मदद मिली तो सभी को बाहर निकाला जा सका। तौकीर का कहना है कि जिस तरह से संतुलन बिगड़ा है उससे लग रहा है कि चालक को नींद की झपकी आई और इससे ही हादसा हो गया।