चंदौसी। गीता सत्संग भवन में चल रही श्री मद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक प्रिया किशोरी ने बताया कि भक्ति की कोई आयु व समय- सीमा नहीं होती। जब समय मिल जाए, तभी भक्तों को भगवान की भक्ति में लीन हो जाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने भक्त प्रहलाद का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया। कथा वाचक ने बताया कि भक्त प्रहलाद भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। लेकिन उनके पिता हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु को अपना शत्रु समझते थे। जिस कारण हिरण्यकश्यप भक्त प्रहलाद को बहुत कष्ट देता था। एक बार भक्त प्रहलाद ने भगवान विष्णु को पुकारा, तब भगवान नरसिंह का रूप धारण प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप को मौत के घाट उतार दिया। कहा कि भक्ति मार्ग ही एकमात्र सुख और मोक्ष प्राप्ति का साधन है। मानव तन मुश्किल से मिलता है। इसलिए हम सभी को हरि भजन करना चाहिए। इस अवसर पर कृष्णौतार गुप्ता, हरिओम मिश्रा, ग्रीश शर्मा, हरेंद्र सिंह, रोहित गुप्ता, कृष्णा गोपाल गुप्ता, माधव मिश्रा, डॉ. जय शंकर दुबे, जगदीश राणा आदि मौजूद रहे।